सहारा समूह की सहकारी समितियों में जमा रकम वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे लाखों निवेशकों के लिए राहत की खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल को दोबारा सक्रिय कर दिया है. इसके साथ करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच और पात्र निवेशकों को भुगतान की प्रक्रिया फिर आगे बढ़ सकेगी.

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42 लाख जमाकर्ताओं के रुपये हुए वापस

सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, रिफंड प्रक्रिया के तहत अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को कुल 9,267 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं. यह राशि सीधे जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है. पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद शेष पात्र दावेदारों के आवेदनों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है.

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क्यों प्रभावित हुई प्रक्रिया?

रिफंड का काम कुछ समय से कई तरह की दिक्कतों के कारण प्रभावित था. सहारा समूह की संबंधित सहकारी समितियों के सामने सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था, जरूरी लाइसेंस, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों के रखरखाव के साथ कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं थीं. इन कारणों से दावों के सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ पा रही थी.

मंत्रालय के मुताबिक, नवंबर 2025 में सहारा समितियों के परिसरों को कुछ ऐसे मामलों के चलते सील कर दिया गया था, जिनका इन सहकारी समितियों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था. इसके बाद समितियों के नियमित कामकाज पर असर पड़ा और रिफंड से जुड़े कार्य भी प्रभावित हुए. सहकारिता मंत्रालय ने हस्तक्षेप करते हुए तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर कराया, जिसके बाद पोर्टल को फिर से सक्रिय किया गया है.

सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं को मिलेगा लाभ

रिफंड पोर्टल के माध्यम से सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के पात्र जमाकर्ताओं के दावों पर कार्रवाई की जा रही है. इनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी शामिल हैं.

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जुलाई 2023 में शुरू हुआ था पोर्टल

सहारा रिफंड पोर्टल की शुरुआत जुलाई 2023 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद की गई थी. इसका उद्देश्य सहकारी समितियों के रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक तथा पात्र जमाकर्ताओं की पहचान करना और उनकी जमा रकम वापस करने की व्यवस्था उपलब्ध कराना है.

आधार से पहचान, रिकॉर्ड से मिलान के बाद होगा भुगतान

रिफंड की व्यवस्था ऑनलाइन और कागज रहित तरीके से तैयार की गई है. आवेदन करने वाले जमाकर्ता की पहचान आधार के माध्यम से की जाती है. इसके बाद नाम, सदस्यता से जुड़ी जानकारी और बैंक खाते का विवरण संबंधित सहकारी समिति के रिकॉर्ड से मिलाया जाता है. जमाकर्ता की ओर से जमा प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांचे जाते हैं. सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र पाए गए दावेदार की रकम उसके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है.

नया दावा कहां जमा करें, पुराने आवेदन में गलती हो तो क्या करें

निवेशकों को नया दावा जमा करने के लिए केवल आधिकारिक सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. जिन लोगों ने पहले आवेदन किया था और उनके दावे में किसी तरह की गलती बताई गई है, वे सुधार के लिए दावा दोबारा जमा करने वाले पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फर्जी वेबसाइट और एजेंटों से सावधान रहने की सलाह

सरकार ने निवेशकों को गैर-अधिकृत वेबसाइटों, एजेंटों और भ्रामक दावों से सतर्क रहने को कहा है. आवेदन या दोबारा आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना और बैंक खाते की सही जानकारी दर्ज करना महत्वपूर्ण है. सही जानकारी देने से दावे के सत्यापन में अनावश्यक अड़चन से बचा जा सकता है और पात्र होने पर भुगतान की प्रक्रिया समय पर आगे बढ़ सकती है.