Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया सोमवार को पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को पार कर गया. वित्त वर्ष में 2025-26 में अब तक रुपये में रिकॉर्ड 9.88 परसेंट की गिरावट आई है, जो पिछले 14 सालों में देखी गई सबसे बड़ी गिरावट है.

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कल सुबह के कारोबार में इसमें एक अच्छी रिकवरी देखी गई थी, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 128 पैसे मजबूत हुआ था. लेकिन आखिरकार 94.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. रुपये में यह गिरावट भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते आई. 

रुपये को लगा 'शॉक'

आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ जाता है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ जाती है और इस तरह रुपये पर नीचे की ओर दबाव पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का 85 परसेंटतेल आयात करता है. तेल महंगा होगा, तो भारत को भुगतान के लिए अधिक डॉलर चुकाने होंगे. इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपये की वैल्यू गिरेगी.

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महंगा तेल व्यापार घाटा (Trade Deficit) भी बढ़ा रहा है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपये को काफी नुकसान पहुंचा है और कई कारणों से यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है.   

RBI ने की बड़ी कोशिशें

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को संभालने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन बाहरी दबाव इतना है कि RBI की कोशिशें इस गिरावट को रोकने में नाकाफी रहीं. 
  • सबसे पहले तो रिजर्व बैंक ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे. मार्च के केवल दो हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 19 मिलियन की कमी आई है.
  • RBI ने बैंकों पर एक्सपोजर की लिमिट भी कम कर दी. बीते 27 मार्च को रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशन (NOP) की लिमिटको घटाकर 100 मिलियन डॉलर कर दिया ताकि डॉलर की सट्टेबाजी पर लगाम लग सके.
  • RBI के इन प्रयासों के चलते सोमवार के शुरुआती कारोबार में रुपये में कुछ सुधार (93.57 तक) देखने को मिला. लेकिन ईरान में जंग को लेकर लगातार आ रहीं खबरों के बीच रुपया संभल नहीं पाया और यह फिसलकर 95.22 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.

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