Rupee vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है. आज बुधवार, 21 जनवरी को भारतीय रुपया और कमजोर होकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में यह 23 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.20 पर पहुंच गया. यानी कि अब एक डॉलर खरीदने में आपको 91.20 रुपये खर्च करने होंगे. अब तक का नया ऑल-टाइम लो लेवल है.
इससे एक दिन पहले यानी कि मंगलवार को रुपया पहले ही 7 पैसे की गिरावट के साथ 90.97 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था. डॉलर के आगे रुपये में लगातार इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
रुपये पर बढ़ रहा दबाव
एक तरफ विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से निकलते जा रहे हैं. दूसरी तरफ भारत-अमेरिका के बीच लटकी ट्रेड डील का दबाव बना हुआ है. इन मुश्किल हालातों को देखते हुए आयातकों को कहीं न कहीं ये लग रहा है कि रुपया और गिरेगा. ऐसे में ये डॉलर को अपने पास रिजर्व रख रहे हैं. इससे उनके बीच डॉलर की मांग बढ़ रही है. बाजार में जोखिम को लेकर सतर्कता वाला माहौल रुपये में इस नई गिरावट के लिए जिम्मेदार है.
आलम यह है कि जहां साल 2025 में रुपये में 5 परसेंट तक की गिरावट आई थी. वहीं, अभी नए साल का पहला महीना खत्म भी नहीं हुआ है रुपया 1.5 परसेंट तक गिर चुका है. इसके अलावा, निर्यात के मुकाबले आयात का ज्यादा होना भी रुपये पर दबाव बना रहा है क्योंकि जब हम कोई सामान आयात करते हैं, तो उसका पेमेंट डॉलर में करते हैं. ये सब मिलकर रुपये को कमजोर बना रहे हैं.
रुपये में गिरावट के नुकसान
रुपये में गिरावट इकोनॉमी के लिए ठीक नहीं मानी जाती है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने की संभावना बनी रहती है. इसका असर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से लेका इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स पर देखने को मिलता है. भारत सबसे ज्यादा लगभग 80 परसेंट कच्चे तेल का आयात करता है.
इसके अलावा, मोबाइल फोन व दूसरे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स के पार्ट्स वगैरह भी दूसरे देशों से मंगाता है. ऐसे में रुपये गिरेगा, तो डॉलर पर ज्यादा खर्च बैठेगा. इससे आयात महंगा होगा. जब आयात महंगा होगा, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम के दाम बढ़ेंगे. इससे ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगा. इससे आयात किया गया सामान भी महंगा हो जाएगा इसलिए महंगाई को काबू में रखने के लिए रुपये में गिरावट को रोकना जरूरी है.
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