पेट्रोल-डीजल और CNG महंगी, महंगाई से कैसे बढ़ जाएगी आपकी लोन EMI, अब इसका गणित समझ लीजिए
पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में RBI रेपो रेट बढ़ा सकता हैं. जिससे होम लोन और कार लोन समेत अन्य लोन की EMI महंगी हो सकती है. आइए जानते हैं, इस बारे में.

- ईंधन की बढ़ती कीमतों से महंगाई का खतरा बढ़ा.
- केंद्रीय बैंक महंगाई नियंत्रण के लिए रेपो रेट बढ़ाता है.
- रेपो रेट बढ़ने से लोन महंगा, ईएमआई बढ़ती है.
- RBI के कदम से बाजार में मांग घटती है.
Inflation Alert: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर आज पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में देखने को मिला. वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई में आ रही रुकावटों के चलते देश की प्रमुख गैस वितरण कंपनियों ने सीएनजी के रेट 2 रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया. साथ ही पेट्रोल-डीजल के दाम भी 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए है.
ऐसे में आम लोगों पर महंगाई का खतरा बढ़ गया हैं. महंगाई की मार के साथ-साथ लोन EMI बढ़ने को लेकर भी शंकाएं की जा रही है. आइए जानते हैं, महंगाई की वजह से कैसे आपकी लोन ईएमआई भी बढ़ सकती हैं?
महंगाई बढ़ने पर RBI क्यों बढ़ाता हैं रेपो रेट?
जब देश में चीजों के दाम तेजी से बढ़ने लगते हैं, साथ ही महंगाई RBI के तय दायरे से ऊपर चली जाती है, तब केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाने का फैसला लेती है. RBI आमतौर पर महंगाई को 4% से 6% के बीच रखने की कोशिश करता हैं. अगर खाने-पीने की चीजें, ईंधन या दूसरी जरूरी सेवाएं ज्यादा महंगी होने लगती है, तो महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रेपो रेट बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाते हैं.
रेपो रेट बढ़ने से कैसे कम होती है महंगाई?
रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता हैं. इसके बाद बैंक भी होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्जों की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं.
जब लोन महंगा होता है, तो लोग कम खर्च करते हैं और नई खरीदारी या निवेश करने से बचते हैं. जिससे बाजार में मांग कम होने लगती है और धीरे-धीरे चीजों की कीमतों पर दबाव घट जाता है. महंगाई को काबू करने के लिए आरबीआई ऐसे कदम उठाती हैं.
रेपो रेट बढ़ने पर क्यों बढ़ जाती है EMI?
जब RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) रेपो रेट बढ़ाता हैं, तो इसका सीधा असर बैंकों से मिलने वाले लोन पर पड़ता है. दरअसल, रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर बैंक RBI से पैसा उधार लेते हैं. रेट बढ़ने का मतलब है कि बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा हो गया है. ऐसे में बैंक अपनी बढ़ी हुई लागत को पूरा करने के लिए होम लोन, कार लोन समेत दूसरे कर्जों की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं.
इसका असर लोन ईएमआई में देखने को मिलता है. ब्याज दर बढ़ते ही या तो हर महीने की EMI बढ़ जाती है या फिर लोन चुकाने की अवधि लंबी करने का फैसला लिया जाता है. यानी कुल मिलाकर ग्राहक को पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है और लोन की कुल लागत भी बढ़ जाती है.
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