बैंक से जुड़ा कोई काम समय पर पूरा न हो तो ग्राहकों को अकसर कई चक्कर लगाने ही पड़ते हैं. कभी क्रेडिट कार्ड बंद कराने में देरी होती है, तो कभी लोन चुकाने के बाद भी प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज नहीं मिलते. ऐसे मामलों में अब ग्राहकों के पास केवल शिकायत करने का ही नहीं, बल्कि नियमानुसार मुआवजा पाने का विकल्प भी है.

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अलग-अलग बैंकिंग सेवाओं के लिए समयसीमा तय की है. नियमों का पालन नहीं होने पर कुछ परिस्थितियों में बैंक को रोजाना के हिसाब से भुगतान करना पड़ सकता है.

1. क्रेडिट कार्ड बंद करने में देरी पर 500 रुपये प्रतिदिन

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अगर ग्राहक ने क्रेडिट कार्ड बंद करने का अनुरोध दिया है और सभी बकाया चुका दिए हैं, तो बैंक को सात कार्य दिवस के भीतर कार्ड बंद करना होता है. ऐसा नहीं होने पर, लागू नियमों के तहत बैंक को देरी के प्रत्येक कैलेंडर दिन के लिए 500 रुपये का मुआवजा देना पड़ सकता है, यह राशि कार्ड बंद होने तक देय हो सकती है.

2. प्रॉपर्टी के कागजात लौटाने में देरी पर 5 हजार रोजाना

होम लोन या अन्य पात्र व्यक्तिगत लोन का पूरा भुगतान करने के बाद बैंक को 30 दिनों के भीतर मूल संपत्ति दस्तावेज लौटाने होते हैं. यदि देरी बैंक की वजह से होती है, तो RBI के नियमों के अनुसार ग्राहक को हर दिन 5 हजार मुआवजा मिल सकता है. दस्तावेज खोने या खराब होने पर बैंक को उनकी डुप्लीकेट या प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने में मदद और संबंधित खर्च भी उठाना होता है.

3. क्रेडिट रिपोर्ट की गलती सुधारने पर 100 रुपये प्रतिदिन

अगर क्रेडिट रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज है और उसे ठीक कराने की शिकायत तय समय में हल नहीं होती, तो ग्राहक को मुआवजा मिल सकता है. लागू नियमों के अनुसार, निर्धारित 30 दिनों की समयसीमा से आगे की देरी पर हर कैलेंडर दिन के लिए 100 रुपये दिए जा सकते हैं.

4. फेल डिजिटल ट्रांजैक्शन पर भी राहत

UPI, ATM या कार्ड से भुगतान विफल होने के बावजूद खाते से पैसा कट जाए, तो संबंधित नियमों के तहत बैंक को तय समय में रकम वापस करनी होती है. कुछ मामलों में देरी होने पर 100 रुपये प्रतिदिन मुआवजे का प्रावधान है. इसकी पात्रता और समयसीमा ट्रांजैक्शन के प्रकार पर निर्भर करती है.

5. बैंक लॉकर में सामान का नुकसान

बैंक लॉकर में रखी वस्तुओं को निर्धारित परिस्थितियों में नुकसान पहुंचने या उनके चोरी होने पर भी बैंक की जिम्मेदारी बन सकती है. लागू RBI दिशानिर्देशों के तहत बैंक की देनदारी सालाना लॉकर किराये की 100 गुना तक सीमित है.

मुआवजा पाने के लिए क्या करें?

ग्राहकों को बैंक में की गई शिकायत की तारीख, ईमेल, रसीद और अन्य संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए. शिकायत का समाधान नहीं होने पर बैंक के शिकायत निवारण तंत्र और पात्र मामलों में RBI के शिकायत पोर्टल का सहारा लिया जा सकता है. हालांकि, मुआवजा हर मामले में नहीं मिलता; यह संबंधित नियमों, समयसीमा और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

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