RBI Currency Changes: भारतीय रुपये के मौजूदा स्वरूप को बदले करीब दस साल हो चुके हैं. नोटबंदी के बाद बैंक नोटों को लेकर अब एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. बढ़ती नकदी की मांग और नोट छापने की बढ़ती लागत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई प्लास्टिक यानी पॉलिमर आधारित बैंकनोट शुरू करने पर विचार कर रहा है.

Continues below advertisement

सूत्रों के मुताबिक, RBI की हाल की बोर्ड बैठकों में प्लास्टिक या बहुलक नोटों के मुद्दे को लेकर चर्चा हुई है. माना जा रहा है कि ये नोट कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक खराब नहीं होते, जिससे छपाई और बदलने की लागत कम हो सकती है.

क्या होते हैं प्लास्टिक या पॉलिमर बैंकनोट?

Continues below advertisement

पॉलिमर बैंकनोट एक खास प्रकार के प्लास्टिक से बने होते हैं. इस प्रकार के नोट को प्लास्टिक मनी या प्लास्टिक नोट कहा जाता है. इनमें मुख्य रूप से Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) सिंथेटिक प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है. ये नोट पतले, लचीले और मजबूत होते हैं, सामान्य कागजी नोटों की तुलना में आसानी से फटते या खराब नहीं होते हैं.

इन नोटों पर सुरक्षा फीचर्स भी बेहतर तरीके से जोड़े जा सकते हैं. साथ ही, मौजूदा एटीएम मशीनें भी पॉलिमर आधारित बैंकनोट वितरित करने में सक्षम होंगे.

Gold-Silver Rate: सोने-चांदी ने फिर पकड़ी रफ्तार, दोनों के आज बढ़ गए दाम; चेक करें लेटेस्ट रेट

क्यों बढ़ रहा है प्लास्टिक नोटों पर जोर?

RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कागज के बैंकनोट छापने में 6372.8 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए, जबकि एक साल पहले यह खर्च करीब 5101.4 करोड़ रुपये था. 2025 में रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया था किनकदी की बढ़ती मांग के कारण नोट छापने की लागत लगातार बढ़ रही है.

इसके अलावा ज्यादातर कागज के बैंकनोट जल्दी खराब हो जाते हैं. साल 2025 में करोड़ों खराब कागज के नोटों को रद्द करना पड़ा, जिनमें सबसे ज्यादा 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल थे. ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर नोट बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं.

कई देशों में पहले से चल रहे हैं पॉलिमर नोट

भारत में प्लास्टिक या पॉलिमर नोट शुरू करने का विचार पहली बार नहीं है. 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने प्रायोगिक तौर पर ऐसे नोट शुरू करने का फैसला किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे लागू नहीं किया जा सका.

आज दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलिमर बैंकनोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले इन्हें शुरू किया था. इसके बाद कनाडा, सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और रोमानिया जैसे देशों ने भी इन्हें अपनाया. अब भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार कर रहा है.

बैंक फ्रॉड केस में CBI ने लिया बड़ा एक्शन, अनिल अंबानी की कंपनी के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल