मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक के नवनियुक्त गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि वह आर्थिक वृद्धि को बनाये रखने के साथ मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिये सरकार समेत सभी संबद्ध पक्षों को साथ लेकर चलेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक के 25वें गवर्नर का पदभार संभालने के बाद उन्होंने यह बात कही. सरकार ने दास को डा. उर्जित पटेल के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक की कमान सौंपी है. दास प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं और केंद्रीय वित्त मंत्रालय में वित्त सचिव पद से सेवानिवृत हुए हैं.
आरबीआई तथा सरकार के बीच केंद्रीय बैंक के कामकाज, पूंजी भंडार तथा करीब आधे सरकारी बैंकों के लिये पीसीए (तत्काल सुधारात्मक कार्यवाही) मसौदा जैसे नियामकीय नीतियों समेत विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के बीच पटेल ने इस्तीफा दिया. उन्होंने कहा, "सरकार केवल एक पक्ष नहीं है बल्कि वह अर्थव्यवस्था और देश को चलाती है तथा बड़े नीतिगत निर्णय लेती है. सरकार तथा आरबीआई के बीच मुक्त, निष्पक्ष और खुले रूप से चर्चा होनी चाहिए." दास नवंबर 2016 में नोटबंदी की घोषणा के समय सरकार के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल थे.
शक्तिकांत दास ने कहा, "मैं इस पर भरोसा करता हूं कि कोई भी मुद्दा, चाहे वह कितना भी जटिल क्यों न हो, उसका समाधान बातचीत से हो सकता है." दास ने कहा कि वह शहर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ गुरुवार को बैठक करेंगे. इसके बाद वह अगले कुछ दिनों में दूसरे सरकारी बैंकों के साथ बैठक करेंगे. वह निजी क्षेत्र के बैंक प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे.
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दास ने कहा, "मैं एक संस्थान के रूप में आरबीआई की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बरकरार रखूंगा. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि आरबीआई पर कोई आंच न आए. आरबीआई एक महान संस्था है और उसकी एक लंबी और समृद्ध विरासत है." दास ने सरकार के साथ मतभेद और डा पटेल के इस्तीफे से जुड़े किसी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया.
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आरबीआई गवर्नर ने कहा, "मैं आरबीआई और सरकार के बीच के मुद्दों में नहीं जाऊंगा. पर यह जरूर है कि हर संस्था को अपनी स्वायत्तता बनाये रखनी है और जवाबदेही के साथ काम करने की जरूरत है." दास ने कहा, "सरकार और आरबीआई के बीच रिश्तों में गतिरोध नहीं हैं. मुझे लगता है कि हितधारकों के साथ बातचीत चलती रहनी चाहिए." उन्होंने कहा कि आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार 14 दिसंबर को होगी.
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