RBI on Rupee News: रुपया इस साल सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली प्रमुख करेंसीज में शामिल है. इस साल इसकी कीमत में डॉलर के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई है. डॉलर के मुकाबले रुपये में आई तेज गिरावट को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि मौजूदा गिरावट के बाद रुपया अब महंगा नहीं है बल्कि अंडरवैल्यूड हो सकता है.

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साल 2026 में अब तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 7% कमजोर हो चुका है. ईरान अमेरिका के बीच जंग से पहले ही विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने की वजह से रुपये पर दबाव था, लेकिन मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से गिरावट तेज हो गई. 

अंडरवैल्यूड कैरेंसी किसे कहते हैं?

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सबसे पहले इस बात पर गौर करना होगा कि, किसी कैरेंसी को अंडरवैल्यूड तब माना जाता है जब उसकी बाजार लेन देन दर आय बुनियादी मौलिक के मुताबिक जरूरी दर से कमजोर होती है. सरल शब्दों में, यदि रुपया अपने उचित या संतुलन कीमत से कम पर कारोबार कर रहा है, तो इकोनोमिस्ट इसे अंडरवैल्यूड कह सकते हैं. 

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मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, हालही में रुपये के गिरने के बाद अब यह करेंसी ज्यादा महंगी नहीं लगने वाली है. बल्कि यह कम मूल्य वाली यानी अंडरवैल्यूड करेंसी हो सकती है. इन दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले काफी गिरा है और 90 के पार चला गया है. यह बाजार की ताकतें ही तय करती हैं कि रुपये की सही कीमत क्या होनी चाहिए. आरबीआई किसी खास लेवल को लक्ष्य नहीं बनाता.

रूपए लुढ़कने की वजह?

रुपए के कमजोर होने के पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह डॉलर की बढ़ती मांग है. विदेशी कंपनियां और निवेशक डॉलर खरीद रहे हैं. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. भारत अपना ज्यादातर तेल विदेश से मंगाता है. ऐसे में डॉलर की जरूरत और बढ़ जाती है, और रूपये में गिरावट आना लाजमी है. 

महंगाई-जंग के बीच RBI की तैयारी 

संजय मल्होत्रा ने कहा, RBI का मकसद अभी भी महंगाई को काबू में करने की है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक फिलहाल Neutral Policy Stance पर कायम है और जरूरत पड़ने पर हालात के मुताबिक कदम उठाने को पूरी तरह तैयार है. गवर्नर के मुताबिक,  बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है. 

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आरबीआई के लिए चुनौति 

रुपए के कमजोर होने के बावजूद आरबीआई की नीति साफ है कि,  रुपया के लिए किसी तरह का कोई तय लेवल नहीं है. बाजार की गहराई पर भरोसा है. गवर्नर ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम अब पहले से ज्यादा मजबूत है. फॉरेक्स रिजर्व अच्छे लेवल पर हैं. इसी के साथ अब अर्थशास्त्रियों का स्वीकार करना पड़ेगा कि, रुपए को पूरी तरह बाजार पर छोड़ देना चाहिए. जरूरत से ज्यादा दखल देने से स्टोक घट सकता है. फिलहाल रुपया 90 के ऊपर है लेकिन लंबे समय में यह भारत की मजबूत बुनियाद की वजह से संभल सकता है.