Rapido Driver Banned: लखनऊ में एक Rapido कैब ड्राइवर को लगभग 100 साल के लिए बैन करने का एक हैरतंगेज मामला सामने आया है. कंपनी ने ड्राइवर पर यह कार्रवाई तब की, जातिवाद को लेकर हुई बहस के बाद उसने चार यात्रियों को अपनी कैब से उतार दिया. 30 साल के दलित कैब ड्राइवर अंकित कुमार ने दावा किया कि कंपनी ने बिना उसकी बात सुने ही उसका अकाउंट सस्पेंड कर दिया. 

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क्या है मामला?

ड्राइवर अंकित कुमार ने बताया कि उसने उतराठिया रेलवे स्टेशन से चार पैसेंजर्स को अपनी कैब में बिठाया था. रास्ते में वे सभी रेलवे के किसी सीनियर अधिकारी को लेकर बात करने लगे और कथित तौर पर उनकी काबिलियत पर सवाल उठाते हुए बार-बार जातिसूचक अपशब्दों और गालियों का इस्तेमाल करने लगे. अंकित खुद दलित समुदाय होने के नाते उन्हें ऐसा करने से मना किया.

जब पैसेंजर्स नहीं माने, तो उसने गाड़ी को तेलीबाग बाजार पुलिस चौकी के पास रोकर यात्रियों को कैब से उतार दिया. अंकित की यात्रियों से हुई इस बहसबाजी कस वीडियो सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गया. अंकित ने बताया कि शुरू में उसने उनकी बातों में दखल नहीं किया, लेकिन जब बातचीत कथित तौर पर जाति-आधारित हो गई, तो उसने इसका विरोध किया. 

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लाइफटाइम के लिए कर दिया सस्पेंड

अंकित के ऐसा करने के बाद यात्रियों की ओर से रैपिडो (Rapido) में शिकायत दर्ज कराई गई. अंकित कुमार ने आरोप लगाया कि यात्रियों की शिकायत पर कंपनी ने उसका पक्ष सुना या जांच किए बगैर ही उसके अकाउंट को 99 साल और 11 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाले अंकित परिवार में इकलौते कमाने वाले हैं. अब इस सस्पेंशन की वजह से उनके परिवार के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. सोशल मीडिया पर लोग रैपिडो के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं. हालांकि, रैपिडो ने इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.

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