Telecom Companies In India 2022 : केंद्र की मोदी सरकार ने दूरसंचार कंपनियों (Telecom Companies) को बड़ी राहत दे दी है. देशभर में दूरसंचार कंपनिया काफी लंबे समय से भारतीय रेलवे (Indian Railways) के साथ खाली पड़ी ज़मीन को लेकर चर्चा कर रही थी. इन प्रयासों के बाद अब रास्ता साफ होने के आसार नजर आ रहे है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने रेलवे (Railways) की दूरसंचार कंपनियों को सेवाएं देने का रास्ता साफ कर दिया है. जिसके बाद दूरसंचार कंपनिया रेलवे की जमीन का उपयोग कर सकेंगी.

टावर लगाने की मिली अनुमति 

रिपोर्ट्स के अनुसार, रेल मंत्रालय ने निजी कंपनियों के लिए अपनी दूरसंचार सेवाओं का दरवाजा खोलते हुए उन्हें रेलवे की जमीन पर दूरसंचार टावर स्थापित करने की अनुमति दे दी है. अब तक यह अ​धिकार रेलवे की दूरसंचार इकाई- रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Railtel Corporation of India) के पास ही था. लेकिन अब बाकि प्राइवेट कंपनी भी अप्लाई कर सकती है.

प्राइवेट इन्वेस्टर का बढ़ेगा निवेश

रेलवे में प्राइवेट इन्वेस्टर को बढ़ाने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है. रेलवे ने भूमि के लाइसेंस शुल्क (LLF) मानदंडों में ढील दिए जाने के कुछ महीने बाद ही यह पहल शुरू की है. नई एलएलएफ नीति के अनुसार, मोबाइल टावरों के लिए 7 फीसदी राजस्व हिस्सेदारी की मौजूदा दरें खत्म की गई हैं. अब भूमि के बाजार मूल्य का 1.5 फीसदी वार्षिक भूमि उपयोग शुल्क लागू होगा.

रेलवे के क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश जारी 

सूत्रों के अनुसार, देश में यह पहल 5-G सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए की गई है. रेलवे के क्षेत्रीय कार्यालयों को दिशा- निर्देश जारी कर दिए है. इस अनुमति से रेलवे की भविष्य की नेटवर्क जरूरतों पर प्रमुखता से पूरा किया जा सकेगा. मालूम हो कि अभी तक रेलवे की दूरसंचार जरूरतें केवल रेलटेल के लिए खुली थीं. अब निजी कंपनियों के लिए भी खुलने जा रही है. ये कंपनी दूरसंचार टावर स्थापित करेंगी. उन टावरों का उपयोग वा​णि​ज्यिक तौर पर भी करेंगी.

पहले लगी थी रोक 

रेल मंत्रालय ने वर्ष 2016 में एक आदेश जारी कर रेलटेल को छोड़कर किसी भी अन्य कंपनी को रेलवे की जमीन पर टावर खड़ा करने से रोक दिया था. मगर अब यह आदेश वापस ले लिया गया है. नई नीति में रेलवे के 70 मंडलों के रेलवे कार्यालयों एवं स्टेशन परिसरों में खंभों (पोल) पर उपकरण एवं छोटे सेल लगाने की अनुमति दी है.

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