Petrol-Diesel Rate Today on July 27: आज 27 जुलाई को देश भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर नए सिरे से कूटनीतिक बातचीत शुरू हो गई है. इसके चलते पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट आई थी. जहां गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, शुक्रवार को इसमें लगभग 4% तक की गिरावट आई.

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संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के यह कहने के बाद कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को बातचीत का एक और मौका दे रहे हैं. यही वजह है कि पिछले लगातार दो दिनों से दोनों देशों की तरफ से एक-दूसरे पर कोई हमला नहीं हुआ है. इसके चलते होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर शिपिंग शुरू होने की फिर से उम्मीद जगी है.

होर्मुज क्यों इतना जरूरी?

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% से अधिक कच्चा तेल गुजरता है. अमेरिका और ईरान के बीच जब भी कमी युद्ध बढ़ने की आशंका होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई रूकने के डर से कीमतें तुरंत आसमान छूने लगती हैं. इससे पहले अप्रैल के महीने में दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष चरम पर पहुंचने पर ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था. तब भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी.

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आज शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमत

शहर पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली  102.12 रुपये95.20 रुपये
मुंबई 111.21 रुपये97.83 रुपये
कोलकाता113.51 रुपये99.82 रुपये
बेंगलुरु110.93 रुपये98.80 रुपये
चेन्नई 107.77 रुपये 99.55 रुपये
पटना 113.35 रुपये 99.36 रुपये
सूरत101.81 रुपये97.92 रुपये
वाराणसी102.03 रुपये 95.53 रुपये
कानपुर101.59 रुपये95.06 रुपये

कब से स्थिर है कीमत?

25 मई के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बदले गए हैं. इस दौरान सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी.

पेट्रोल और डीजल की कीमतें सबसे ज्यादा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की अंतरराष्ट्रीय कीमत से प्रभावित होती हैं क्योंकि यह दोनों के लिए ही मुख्य कच्चा माल है. इसके अलावा, डॉलर और रुपये के बीच एक्सचेंज रेट का भी इस पर बड़ा असर पड़ता है क्योंकि क्योंकि भारत कच्चे तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है. जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो कच्चा तेल खरीदने की लागत बढ़ जाती है, जिससे सीधे तौर पर ईंधन की खुदरा कीमतें बढ़ सकती हैं.

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