कच्चे तेल की कीमतें पिछले काफी समय से तेजी से बढ़ रही हैं. हालांकि जुलाई के बाद से दाम थोड़े स्थिर हुए थे. जिसके बाद अब सितंबर में एक बार फिर से कच्चे तेल के दामों में दोबारा उछाल मारी है. सोमवार को तेल की कीमतें 3 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ीं. इसकी वजह पिछले हफ्ते हुए वेस्ट एशिया में हमले हैं, क्योंकि इन हमलों में सऊदी अरब से आ रही शिप्स पर अटैक किया गया.

Continues below advertisement

कच्चे तेल की कीमतों में इजाफासोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.3% बढ़कर 108.04 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 3.5% की बढ़त के साथ 103.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इससे पहले पिछले हफ्ते भी तेल की कीमतों में करीब 9% की बढ़ोतरी हुई थी. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था और करीब 110 डॉलर तक चला गया था, ये जुलाई के बाद पहली बार था, जब ब्रेंट 100 डॉलर के ऊपर पहुंचा.

ये भी पढ़ें: आने वाले दिन पड़ेंगे और भारी! कमजोर मॉनसून और अल नीनो से महंगा होगा खाने का सामान

Continues below advertisement

120 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल?तेल की बढ़ती कीमतों का असर महंगाई पर भी पड़ सकता है. महंगा तेल परिवहन, बिजली और दूसरी चीजों की लागत बढ़ा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रूस की रिफाइनरी में रुकावट और तेल के घटते भंडार जैसी समस्याएं भी बाजार पर दबाव डाल रही हैं. उनका कहना है कि अगर युद्ध और रिफाइनरी क्षमता से जुड़ी समस्याएं दूर नहीं हुईं, तो बाजार में ये चिंता बढ़ रही है कि ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है.

क्या बढ़ेगी पेट्रोल- डीजल की कीमत?कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पेट्रोल- डीजल पर भी सीधेतौर पर पड़ता है. ऐसे में यदि अनुमान लगाया जा रहा है कि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर के पार पहुंच सकती है, तो तेल कंपनियों पर भी दबाव बढ़ेगा. स्टॉक में कमी आएगी और कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से पेट्रोल- डीजल की कीमत भी बढ़ सकती है. ऐसे में आने वाले समय में और भी महंगाई बढ़ सकती है.

ये भी पढ़ें: बप्पा के दरबार में अडानी परिवार, प्रणव और करण ने किए 'चिंचपोकली च्या चिंतामणी' के दर्शन