Apple Manufacturing in Pakistan: अमेरिकी टेक कंपनी Apple पाकिस्तान में iPhone बनाने का काम शुरू करने जा रहा है. ऐसा हम नहीं, बल्कि पाकिस्तानी मीडिया में गुरुवार को छपी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार ने प्रस्तावित मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क के तहत इंसेंटिव देने पर सहमति दे दी है. 

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रिपोर्ट में दावा किया गया कि Apple पाकिस्तान में आईफोन बनाने के लिए इसलिए तैयार हुआ है क्योंकि पाकिस्तान की सरकार ने कंपनी को बहुत कम कीमत पर इंसेंटिव और जमीन दोनों देने पर सहमति जताई है. बाद में पड़ताल की गई, तो यह रिपोर्ट फेक निकली.

सच्चाई यह है कि Apple पाकिस्तान में iPhone नहीं बनाएगा, बल्कि नए फ्रेमवर्क के तहत कंपनी की तरफ से री-एक्सपोर्ट के लिए एक रिफर्बिशमेंट यूनिट बनाई जाएगी. इस यूनिट में 2-3 साल पुराने आईफोन की मरम्मत कर उसे री-एक्सपोर्ट करने का काम किया जाएगा. इसका मकसद आईफोन में लोकल इक्विपमेंट्स के इस्तेमाल को 12 परसेंट से बढ़ाकर 35  परसेंट करना है. यह पाकिस्तान को एक रीजनल मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में स्थापित करने का एक प्रयास है. 

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Apple की शहबाज सरकार से क्या रही मांग? 

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, Apple मैनेजमेंट की शहबाज सरकार से डिस्काउंटेड रेट पर जमीन देने, 8 परसेंट परफॉर्मेंस इंसेंटिव और दो से तीन साल पुराने iPhones को रिपेयर करने की डिमांड थी.

इंजीनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड के CEO हमाद अली मंसूर ने अखबार को बताया, "हमने इन तीन शर्तों को नए प्रपोज्ड मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फ्रेमवर्क में शामिल किया है, जिसे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मंजूरी देंगे." उन्होंने कहा कि एप्पल ने इसी मॉडल के साथ इंडोनेशिया, मलेशिया और भारत में कदम रखा था, जहां उसने दो से तीन साल पुराने iPhones को रिपेयर करना शुरू किया था, जिसका मकसद शुरू में लोकल मैनपावर को ट्रेनिंग देना था और बाद में हैंडसेट को बनाने का काम शुरू करना था. 

निवेशकों को लुभाने की सरकार की स्कीम 

पाकिस्तान की सरकार मौजूदा समय में मोबाइल मैन्युफैक्चररर्स को 6 परसेंट इंसेंटिव देती है, लेकिन Apple जैसे दूसरे ग्लोबल निवेशकों को लुभाने के लिए इसे बढ़ाकर 8 परसेंट करने का प्रस्ताव है. यह स्कीम खासतौर पर उन मोबाइल फोन्स के लिए है, जो पाकिस्तान में असेंबल होकर दूसरे देशों में एक्सपोर्ट किए जाएंगे. इससे देश को विदेशी मुद्राएं मिलेंगी, जिससे इकोनॉमी में सुधार आएगा. 

परफॉर्मेंस इंसेंटिव एक ऐसी स्कीम है, जिसमें सरकार कंपनी को अधिक उत्पादन और बेहतर प्रदर्शन के आधार पर टैक्स में छूट या कैशबैक जैसे वित्तीय लाभ देती है. यह लाभ तभी मिलता है, जब कंपनी उत्पादन को लेकर निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करती है.

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर Apple को रिफर्बिशमेंट और री-एक्सपोर्ट की इजाजत मिलती है, तो इससे पहले ही साल में 100 मिलियन डॉलर के राजस्व का अनुमान है. बताया जा रहा है कि सरकार इसे मंजूरी देने की तैयारी में है और हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के इंजीनियरिंग डेवलपमेंट बोर्ड (EBD) ने 'मोबाइल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइसेज मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2026-33' का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जो अब प्रधानमंत्री की मंजूरी के अधीन है. 

 

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