Debts on Pakistan: पाकिस्तान धीरे-धीरे पूरी तरह से दिवालिया होने की कगार पर पहुंचता नजर आ रहा है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) की जारी एक नई रिपोर्ट (अगस्त 2026 तक) के मुताबिक, पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ता जा रहा है. 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले चार सालों में यहां के सरकारी कर्ज में बंपर उछाल आया है. 

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इस साल जून के आखिर तक, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और कुछ अन्य कर्ज को छोड़कर पाकिस्तान का आतंरिक या राष्ट्रीय कर्ज 59.44 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. वहीं, पाकिस्तान की करेंसी में उस पर 24.20 लाख कराड़ का विदेशी कर्ज का बोझ भी है. इन दोनों को मिलाकर पाकिस्तान पर कुल कर्ज 83.6 ट्रिलियन रुपये (83,000,000,000,000 रुपये) तक पहुंच गया है. ऊपर से पिछले चार सालों के मुकाबले कर्ज में लगभग 75% का इजाफा भी हुआ है. 

कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान की इकोनॉमी इस वक्त 'Debt Trap' में फंसी हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय बजट का लगभग 40-50% हिस्सा केवल पुराने कर्जों का भुगतान करने में ही चला जाता है. देश को अपने पुराने कर्ज पर ब्याज और मूलधन को चुकाने के लिए अलग से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से उधार भी लेना पड़ रहा है इसलिए वह चाहकर भी कर्ज के जाल से नहीं निकल पा रहा है. 

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बेशक हाल-फिलहाल के दिनों में टैक्स कलेक्शन से सरकार की अच्छी-भली कमाई हुई है, लेकिन इसके मुकाबले खर्च बहुत ज्यादा है. प्रशासनिक खर्च, मंत्रालयों के रख-रखाव और सब्सिडी पर भी सरकार का बहुत सा पैसा चला जाता है. पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वल्ड बैंक जैसी विदेशी संस्थाओं से तो कर्ज ले ही रही है, लेकिन साथ में अपने देश के बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भी उधारी का पैमाने बढ़ता जा रहा है. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि पाकिस्तान पर घरेलू खर्च 59.44 लाख करोड़ है, जो पिछले साल के मुकाबले 9% बढ़ा है.

सरकार ने क्या उठाए कदम?

पाकिस्तान की स्थिति वाकई में चिंताजनक है. हालांकि, ब्याज के बोझ को कुछ कम करने के लिए पाकिस्तान ने कारोबारी साल 2025-26 के दौरान लगभग 2.9 ट्रिलियन कर्ज का भुगतान समय पर किया है. साथ ही देश का इस वक्त कर्ज-टू-जीडीपी रेशियो 75% से घटकर 68.5% पर आ गया है, जो कि इकोनॉमी में मामूली सुधार के संकेत हैं. 

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