अच्छी कमाई होने के बावजूद अगर अचानक नौकरी चली जाए या कोई बड़ा खर्च सामने आ जाए, तो आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है. अमेरिका में भी बड़ी संख्या में लोग ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं.

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पियू रिसर्च सेंटर के एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका के 53 फीसदी वयस्कों के पास इतनी बचत नहीं है कि वे बिना कमाई के तीन महीने तक अपने खर्च चला सकें. इससे पता चलता है कि वहां कई लोगों के लिए आर्थिक सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

हर महीने के बिल चुकाना भी मुश्किल

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सर्वे में लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक परेशानियां भी सामने आईं. करीब 27 फीसदी अमेरिकी वयस्कों ने बताया कि वे किसी सामान्य महीने में अपने कुछ बिल पूरे नहीं चुका पाते या उन्हें आंशिक भुगतान करना पड़ता है.

इसके अलावा, 44 फीसदी लोगों को पिछले एक साल में कम से कम एक जरूरी खर्च उठाने में परेशानी हुई. इनमें इलाज, आने-जाने का खर्च, घर का किराया या होम लोन और खाने-पीने की चीजें शामिल हैं. कम आय वाले लोगों के लिए इन जरूरतों को पूरा करना विशेष रूप से कठिन रहा.

कम कमाई वाले लोगों की स्थिति ज्यादा खराब

सर्वे में आमदनी के आधार पर लोगों की आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दिया. कम आय वाले लोगों में 77 फीसदी के पास तीन महीने का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त इमरजेंसी बचत नहीं है. वहीं, मध्यम आय वर्ग के 52 फीसदी लोगों के पास भी ऐसा फंड नहीं है.

इसके मुकाबले ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की स्थिति बेहतर है. इस वर्ग के करीब 20 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके पास तीन महीने तक के खर्च के लिए पर्याप्त बचत नहीं है. इन आंकड़ों से साफ है कि कम आमदनी वाले परिवारों के लिए अचानक आने वाले खर्च संभालना ज्यादा मुश्किल हो सकता है . 

भविष्य के लिए बचत नहीं कर पा रहे लोग

सर्वे के अनुसार, 54 फीसदी अमेरिकी पिछले एक साल में भविष्य के लिए पैसे नहीं बचा पाए. वहीं, 70 फीसदी लोगों ने बाहर खाने, मनोरंजन और दूसरी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च कम किया. ये आंकड़े बताते हैं कि अच्छी आर्थिक स्थिति वाले देश में भी कई परिवार अपनी जरूरतों और बचत के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

इमरजेंसी फंड क्यों है जरूरी?

इमरजेंसी फंड वह बचत होती है, जिसका इस्तेमाल नौकरी छूटने, बीमारी या अचानक बड़े खर्च की स्थिति में किया जा सकता है. विशेषज्ञ आमतौर पर कम से कम तीन से छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम अलग रखने की सलाह देते हैं. इससे मुश्किल समय में कर्ज लेने या रोजमर्रा की जरूरतों से समझौता करने की नौबत कम हो सकती है.

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