OPEC Decision: तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और रूस समेत सहयोगी देश जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर 6,48,000 बैरल प्रतिदिन करेंगे. माना जा रहा है कि इससे वैश्विक कच्चे तेल के दाम में गिरावट आएगी और अमेरिका, भारत समेत कई देशों में पेट्रोल डीजल के दाम घटेंगे. ओपेक देशों के इस कदम से फ्यूल के ऊंचे दाम और उसके असर से बढ़ती महंगाई का असर झेल रही वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिलेगी.

भारत में कैसे सस्ते हो सकते हैं पेट्रोल डीजल के दामओपेक देशों के फैसले से विश्व में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतें कम होने के रूप में सामने आएगा. कच्चा तेल सस्ता होगा तो निश्चित तौर पर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम नीचे आएंगे. भारत की क्रूड बास्केट के दाम में कटौती आने से देश में फ्यूल सस्ता होगा. 

कितना होगा जुलाई-अगस्त से क्रूड प्रोडक्शनओपेक और सहयोगी देशों (ओपेक प्लस) का फैसला महामारी के दौरान की गयी कटौती को तेजी से बहाल करने में मददगार होगा. ओपेक ग्रुप 2020 से उत्पादन में कटौती को धीरे-धीरे बहाल करने के लिये हर महीने प्रति दिन 4,32,000 बैरल का उत्पादन कर रहा था. इसे बढ़ाकर 6,48,000 बैरल प्रतिदिन करने का फैसला ले लिया गया है. 

ओपेक, सहयोगी देश कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने पर सहमत- जानिए असरओपेक, सहयोगी देशों ने उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी का फैसला ऐसे समय किया गया है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिका में पेट्रोल का दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है. अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत में इस साल की शुरुआत से अबतक 54 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

हालांकि, शुरू में ओपेक के प्रमुख देश सऊदी अरब ने पश्चिमी देशों के ऑयल सप्लाई बढ़ाने के आग्रह का विरोध किया था. यूक्रेन पर हमले के बाद रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के चलते कच्चे तेल उत्पादन में कमी आयी है. इस कमी को पूरा करने के लिये ओपेक और सहयोगी देशों से सप्लाई बढ़ाने को कहा गया था. ऐसी आशंका है कि फ्यूल के ऊंचे दाम से महामारी से उबर रही ग्लोबल इकोनॉमी में पुनरुद्धार की गति धीमी पड़ेगी.

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