प्याज की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है. इसे मौसम की मार कहें या महंगाई का आलम, दोनों ही मामलों में आम आदमी के घर का बजट तो हिल ही रहा है.

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पिछले एक साल की बात करें तो प्याज की खुदरा कीमतों में इतनी तेजी से उछाल आया है, कि हर किसी की आंखें खुली की खुली रह गई हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सरकारी आंकड़ें बता रहे हैं.

मंत्रालय ने जारी किए आंकड़ेदरअसल हाल ही में उपभोक्ता मंत्रालय ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं, जिसके तहत 21 सितंबर को प्याज का थोक भाव 4615.98 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है. जबकि एक साल पहले इसकी कीमतें 3299.85 रुपये प्रति क्विंटल थी. इस एक पूरे साल में प्याज की थोक कीमतें करीब 135 प्रतिशत बढ़ गईं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि इस पूरे एक साल में थोक के भाव में खुदरा से ज्यादा महंगाई देखने को मिल रही है.

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दो महीनों में दिखा भारी उछालप्याज की कीमतें साल के कुछ महीने में शांत रहती हैं और कुछ महीनों में तेजी से उछलती हैं. ये दो महीने होते हैं सितंबर और अक्तूबर. पूरे 10 महीने शांत रहने के बाद इन दो महीनों में ही प्याज की कीमतें सबसे ज्यादा आसमान छूती हैं. बात कें आंकड़ों की तो एक महीने पहले इसकी औसत कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो थी और 21 सितंबर 2026 को 54.23 रुपये पर पहुंच गई.

क्यों बढ़ी प्याज की कीमत?प्याज की कीमतें बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है गर्मियां और बेमौसम बारिश है. क्योंकि इसकी वजह से महाराष्ट्र में प्याज की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. सरकारी एजेंसियों के स्टॉक में भी करीब 30% प्याज खराब हो गई है. इसके अलावा बाजार प्याज का उत्पादन अब बांग्लादेश में भी हो रहा है, जिसकी वजह से बाजारों में कॉम्पिटीशन बढ़ गया है.

सितंबर- अक्टूबर में क्यों बढ़ते हैं दाम?बता दें कि साल के कुछ महीनों में ही प्याज के दाम बढ़ने के पीछे भी खास वजह है. इसकी पहली वजह है मंडियों में प्याज की आवक पर होने वाला बदलाव और दूसरा है फसल चक्र. मार्च- अप्रैल से रबी की फसल की प्याज आती है, जिसका स्टॉक अगली खरीफ की फसल तक आने तक चलाना होता है. ऐसे में इन दो महीनों तक प्याज का स्टॉक खत्म होने की कगार पर होता है, जिसकी वजह से दाम भी बढ़ने लगते हैं.

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