भारत में सब्जियों की कीमत थोड़ी-बहुत ऊपर नीचे हो जाती है, तो लोग परेशान हो जाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जहां सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं.
आप नॉर्वे को ही ले लीजिए- यहां नींबू की कीमत 850 रुपये प्रति किलो, टमाटर 680 रुपये प्रति किलो और एक खीरे की कीमत 300 रुपये है. नॉर्वे में ही रहने वाले एक भारतीय शख्स ने इस हकीकत से रूबरू कराया है. यहां के किसी लोकल स्टोर पर सब्जी खरीदने गए शख्स की नजर जब सब्जियों के रेट्स पर पड़ी, तो वह हैरान हो गए. उनके मन में भारत में किसानों की कमाई को लेकर भी सवाल उठने लगे.
सब्जियों की कीमतें कर रहीं हैरान
X (पहले ट्विटर) पर विनोद नाम के एक यूजर ने एक वीडियो शेयर किया है, जो नॉर्वे में सब्जियों की कीमतों पर बेस्ड है. विनोद का कहना है कि इतने सालों से वह यहां रह रहे हैं, बावजूद इनकी कीमतें उन्हें आज भी हैरान कर देती हैं.
अपने इस पोस्ट में विनोद लिखते हैं, "नॉर्वे में सालों से रहने के बाद भी, जब भी मैं 'बुटीक' जाता हूं, तो वहां की कीमतें मुझे हैरान कर देती हैं." बता दें कि 'बुटीक' एक नॉर्वेजियन शब्द है, जिसका मतलब दुकान या स्टोर है. अपने पोस्ट में विनोद उसी किराने की दुकान की बात कर रहे थे, जहां उन्हें सब्जियों की ये कीमतें दिखी थीं. विनोद ने बताया कि यहां ऑर्गेनिक नींबू की कीमत लगभग 850 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि टमाटर की कीमत लगभग 680 रुपये प्रति किलोग्राम है. वहीं, एक खीरे की कीमत लगभग 300 रुपये है.
भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा कीमत
यहां सब्जियों की इसी बढ़ी हुई कीमत ने विनोद को भारत में फसलों की पैदावार करने वाले लोगों यानी कि किसानों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया. एक तो भारत में बिचौलियों का जाल कुछ इस कदर फैला हुआ है कि किसानों को उनकी सब्जियों की सही कीमत नहीं मिल पाती है.
ऊपर से कोल्ड स्टोरेज और इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में लगभग 15-20% फल और सब्जियां मंडियों तक पहुंचने से पहले ही सड़ जाती हैं. ऐसे में किसान औने-पौने दाम पर ही अपनी फसल बेने के लिए मजबूर हो जाते हैं.
वायरल हुआ पोस्ट
विनोद के इस पोस्ट ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि खेत से ग्राहकों तक फसलें पहुंचती कैसे हैं और इस पूरे सफर में किसे सबसे ज्यादा फायदा मिलता है. यूजर का कहना है कि भारत में फसलों की कीमतें बिचौलिए तय करते हैं और कमाई का एक बड़ा हिस्सा खुद अपने पास रख लेते हैं. यानी कि बाजार से सब्जियां खरीदते वक्त क्या आपने कभी सोचा है कि आपके दिए गए इस पैसे का कितना हिस्सा उन किसानों पर पहुंचेगा, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से इसे उगाया है.
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