नई दिल्लीः साल 2018-2019 के रेल बजट में उत्तरी रेलवे (एनआर) को 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. दुनिया की सबसे अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अपनी समूची सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने के मकसद से उत्तरी रेलवे को यह धनराशि आवंटित की गई है. साल 2018-2019 के लिए आवंटन 565 करोड़ रुपए है. अतिरिक्त धनराशि हर साल जरूरत के मुताबिक जारी की जाएगी. यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम या ईटीसीएस लेवल 2 प्रौद्योगिकी दुनिया की सबसे आधुनिक रेडियो आधारित सिग्नलिंग प्रणाली है.
करीब 6,800 किलोमीटर में फैले रेलवे के उत्तरी जोन के दायरे में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली और चंडीगढ़ आते हैं.
पुराने यांत्रिक सिग्नलिंग की जगह क्षेत्र के 53 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के लिए 398 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. बी कैटेगरी के 25 स्टेशनों पर वाई-फाई लगवाने के लिए उत्तर रेलवे को 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. प्रीमियम ट्रेनों (राजधानी, शताब्दी और दुरंतो) के 4038 डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए निर्भया कोष से 154 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
उत्तरी क्षेत्र के 1,589 स्टेशनों में वीडियो निगरानी प्रणाली लगाने के लिए 365 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. उत्तरी रेलवे के नेटवर्क में नई लाइनें बिछाने के लिए 1900 करोड़ रुपए दिए गए हैं.