यूपीआई पर एमडीआर वाला नियम दीवाली बाद लागू होना है, लेकिन एनपीसीआई ने अभी तक तारीख नहीं बताई है. माना जा रहा है कि यह फैसला एक बार फिर टल सकता है, क्योंकि व्यापारी संगठन इसे एक जनवरी 2027 से लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि दीवाली बाद इसे लागू करने के लिए फ्रेमवर्क तैयार करने का वक्त मिल सके.
NPCI के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर दिलीप असबे ने पहले 'मिंट' से बात करते हुए कहा था कि इसे लागू करने की नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी. उन्होंने कहा, "हमने इसे दीवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है. अंतिम तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी." NPCI के इस फैसले के बाद भी कारोबारियों में नाराजगी है.
कारोबारी किस बात को लेकर हैं नाराज?
NPCI ने अपने फैसले को दीवाली तक टालने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि धनतेरस, दीवाली और छठ जैसे त्योहारों के मौके पर खरीदारी चरम पर होती है. यह साल का वह दौर होता है, जब लोग कपड़ों से लेकर गैजेट्स तक में खूब पैसा खर्च करते हैं. इस दौरान देश में रिकॉर्ड पैमाने पर डिजिटल लेन-देन होता है.
NPCI के मुताबिक, खरीदारी के इतने व्यस्त सीजन के बीच नया चार्ज सिस्टम लागू करने से बाजार के सेंटिमेंट और खर्च पर बुरा असर पड़ सकता है. यही वजह है कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) जैसे बड़े व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इस चार्ज का कड़ा विरोध किया था. उनका कहना यही था कि फेस्टिव सीजन में UPI पर लगने वाले MDR से उनका मुनाफा कम हो जाएगा.
जनवरी 2027 से क्यों लागू करने की है मांग?
कारोबारी चाह रहे हैं कि सरकार इसे नवंबर के बजाय जनवरी, 2027 से लागू करें. ऐसा इसलिए क्योंकि दीवाली के तुरंत बाद शादियों का सीजन आता है. ऊपर से सर्दियों के मौसम में होने वाली खरीदारी भी बढ़ जाती है. क्रिसमस और न्यू ईयर के मौके पर भी लोग होम डेकॉर से लेकर खाने-पीने की कई चीजें खरीदते हैं. पार्टीज और पिकनिक के लिए कैटरिंग/वेन्यू बुकिंग पर भी खर्च होता है. ऐसे में कारोबारियों का तर्क है कि अगर सरकार ने इसे दीवाली के ठीक बाद लागू कर दिया, तो इसका डिजिटल पेमेंट्स पर असर पड़ेगा.
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