Mutual Fund: अपने किसी करीबी को खो देना किसी के लिए भी बहुत आसान नहीं होता. ये वो दुख है जिसे कोई जाहिर भी नहीं कर सकता. ऐसे समय में जब किसी भी क्लेम सेटलमेंट के बारे में बात की जाती है तो वो पूरी प्रक्रिया बहुत एग्जॉस्टिंग होती है. इस इमोशनल डैमेज को और ज्यादा ट्रिगर कर देती है ये सारी फंड्स और क्लेम से जुड़ी समस्याएं. लेकिन अब इस समस्या को देखते हुए खुद SEBI ने इस प्रक्रिया को काफी आसान कर दिया है, आइये जानें कैसे.

Continues below advertisement

पहले से आसान हुई प्रक्रियादरअसल म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के लिए क्लेम की प्रक्रिया अब पहले से काफी आसान हो गई है. सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां हर छोटी गलती या जानकारी के मिसमैच होने पर उसे छोटा मामला ही मानेंगी.

ये भी पढ़ें: E20 Fuel: सरकार E20 पेट्रोल पर पीछे हटेगी या नहीं? संसद में बताया, एथेनॉल से खराब हो रही गाड़ियों पर क्या कहा?

Continues below advertisement

इसके अलावा पहले अगर म्यूचुअल फंड खाते में दर्ज पता और नॉमिनी के KYC में दिया गया पता अलग होता था, तो कई और दस्तावेज जैसे एफिडेविट और डिक्लेरेशन मांगे जाते थे, लेकिन अब AMC KYC में दर्ज सबसे नया पता मानकर क्लेम का निपटारा कर सकती है. इतना ही नहीं बल्कि नाम या हस्ताक्षर में मामूली सा फर्क होने पर भी अब क्लेम बार-बार वापस नहीं किया जाएगा. तय प्रक्रिया के तहत इनकी जांच करके क्लेम आगे बढ़ाया जाएगा.

क्लेम लेने वालों को क्या होगा फायदा?सेबी के द्वारा किए गए इस बदलाव के बाद क्लेम पाने वाले लोगों को काफी आसानी होगी. ऐसी दुख की स्थित में वो थोड़ी राहत की सांस लेंगे. जैसे पहले छोटी-सी गलती के कारण परिवारों को बार-बार दस्तावेज जमा करने पड़ते थे, जिससे क्लेम पूरा होने में कई हफ्तों या दो महीने तक लग जाते थे. लेकिन इन नए नियमों के बाद ऐसा नहीं होगा. इसके बाद आसानी से क्लेम किया जा सकेगा और आसानी से ही क्लेम मिल भी जाएगा.

ये भी पढ़ें: E20: एथेनॉल और कच्चा तेल खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करती है सरकार? संसद में बताया प्रति लीटर का हिसाब