Real Estate News: मुंबई में एक बिल्डर की धोखाधड़ी का शिकार हुआ एक कपल पिछले 10 सालों से न्याय के लिए भटक रहा था. जिसे अब एक दशक के बाद जाकर न्याय मिला है. मामला मुंबई का था जहां पर एक कपल ने बिल्डर के जरिए फ्लैट खरीदा था. फ्लैट क पूरी कीमत देने के बाद भी बिल्डर ने उस फ्लैट को किसी और को दिया था. जिसके बाद कपल ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से अब कपल को न्याय मिला है और ब्याज समेत फ्लैट की पूरी रकम भी वापस मिल गई है.

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क्या है पूरा मामला?दरअसल मोहम्मद जलील हार्नेकर और उनकी पत्नी असगर शबनम ने 2013 में मुंबई में 660 वर्ग फुट का फ्लैट बुक कराया था. पहले उन्होंने डोंगरी की एक परियोजना में निवेश किया था, लेकिन परियोजना रुकने के बाद बिल्डर ने उनकी बुकिंग को मजगांव स्थित 'बे व्यू' परियोजना में स्थानांतरित कर दिया और फ्लैट की कीमत 90 लाख रुपये तय की. कपल ने 2018 तक पूरी रकम चुका दी, लेकिन न तो उन्हें फ्लैट का कब्जा मिला और न ही बिक्री समझौता पंजीकृत हुआ.

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बिल्डर की चालाकीबाद में पता चला कि बिल्डर ने चालाकी की है और वही फ्लैट किसी और खरीदार को बेच दिया गया है. जिसके बाद कपल ने बिल्डर से बात की और उससे अपनी रकम वापस मांगी, तब बिल्डर ने 1.25 करोड़ रुपये के चेक दिए, लेकिन खाते में पर्याप्त रकम नहीं थी जिसकी वजह से चेक बाउंस हो गए. जिसके बाद कपल आयोग के पास मदद की गुहार लगाने पहुंचा था.

आयोग का फैसलामामले की शिकायत आने के बाद पूरा मामला जान आयोग ने भी इसे गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना. जिसके बाद आयोग ने बिल्डर को 1.05 करोड़ रुपये 10% सालाना ब्याज के साथ लौटाने, 50,000 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 25,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है. अगर 60 दिनों के अंदर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़ाकर 15% कर दी जाएगी.

आयोग के इस फैसले से पीड़ित कपल को काफी राहत मिली है. ये मामला पिछले 10 सालों से लंबित था. जिसके बाद कपल को अब जाकर राहत की सांस मिली है.

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