देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने एक ऐसी इनवेस्टमेंट से एग्ज़िट ली है, जिसे भारत की कॉर्पोरेट दुनिया के सबसे ज़बरदस्त लॉन्ग टर्म बेट्स में गिना जाएगा. 2008 में 500 करोड़ रुपये लगाकर खरीदे गए एशियन पेंट्स के शेयरों से अब उन्हें 9,080 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, यानी करीब 2,200 फीसदी का रिटर्न.

कैसे हुई ये चमत्कारी डील?

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में एशियन पेंट्स में अपनी बची हुई हिस्सेदारी, यानी 87 लाख शेयर, औसतन 2,207.65 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर ICICI प्रूडेंशियल लाइफ म्यूचुअल फंड को बेच दिए. इससे कंपनी को 1,876 करोड़ रुपये मिले.

इससे पहले, RIL ने पिछले हफ्ते 3.5 करोड़ शेयर, 2,201 रुपये प्रति शेयर के भाव पर SBI म्यूचुअल फंड को 7,704 करोड़ रुपये में बेचे थे. यानि कुल मिलाकर रिलायंस ने एशियन पेंट्स से 9,580 करोड़ रुपये कमाकर पूरी हिस्सेदारी बेच दी है.

टाइमिंग कमाल की रही

एग्ज़िट का टाइम एकदम परफेक्ट निकला, क्योंकि एशियन पेंट्स इस वक्त अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहा है. पिछले दो साल में इसके शेयर 30 फीसदी से ज़्यादा टूट चुके हैं. और मार्केट शेयर 59 फीसदी से गिरकर 52 फीसदी तक आ चुका है. इसके पीछे वजह है अदित्य बिड़ला ग्रुप की नई एंट्री, बिरला ओपस पेंट्स.

वहीं रेवेन्यू ग्रोथ भी चार तिमाही से ठंडी पड़ी है और मार्जिन भी दबाव में हैं सस्ते कच्चे माल के बावजूद, ज़्यादा छूट और बढ़ती कॉम्पिटिशन की वजह से प्रॉफिट मार्जिन घटे हैं.

RIL की स्ट्रैटेजिक सोच को मिला निवेशकों का भरोसा

मुकेश अंबानी ने एशियन पेंट्स से निकलकर साफ कर दिया है कि अब उनकी नज़रें न्यू एनर्जी और AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हैं. मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषक मानते हैं कि RIL अब अपने चौथे मोनेटाइज़ेशन फेज़ में है. अगले तीन साल में कंपनी हर साल औसतन 15 बिलियन डॉलर खर्च करेगी, लेकिन उसके कैश फ्लो इसे पूरी तरह सपोर्ट करेंगे. 2027 तक कंपनी की रेटिंग बेहतर होने की उम्मीद है, क्योंकि अब उसका रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड (ROCE) 9 फीसदी से ऊपर जा सकता है.

2008 में लगाई थी ये ‘विपरीत सोच’ वाली बाज़ी

जब 2008 में पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से जूझ रही थी और Lehman Brothers जैसी दिग्गज कंपनियां ढह रही थीं, तब अंबानी ने विपरीत सोच दिखाते हुए 500 करोड़ रुपये में एशियन पेंट्स की 4.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी. और अब 17 साल बाद, उसी बाज़ी ने 9,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का फायदा दिया.

5 साल पहले जब रिलायंस अपनी बैलेंस शीट से कर्ज उतार रहा था और राइट्स इश्यू ला रहा था, तब भी उसने एशियन पेंट्स की हिस्सेदारी नहीं बेची. इसके बजाय डिजिटल, रिटेल और टेलीकॉम में 25 बिलियन डॉलर जुटाए और वो भी ग्लोबल इन्वेस्टर्स से.

एशियन पेंट्स मार्केट में अब भी मज़बूत

भले ही कंपनी इस समय मुश्किलों से घिरी हो, लेकिन 74,000 से ज़्यादा डीलर्स के साथ यह अब भी भारत की सबसे बड़ी पेंट डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क चलाती है और 60 से ज़्यादा देशों में उपस्थिति बनाए हुए है.

हालांकि, ब्रोकरेज फर्म्स अब थोड़ा सतर्क हो गए हैं. नुवामा ने FY26 और FY27 के लिए 6-8 फीसदी तक की अर्निंग कटौती की है और EPS ग्रोथ अनुमान सिर्फ 7.2 फीसदी रखा है. टारगेट प्राइस को घटाकर 2,200 रुपये कर दिया गया है और रेटिंग भी ‘न्यूट्रल’ रखी गई है.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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