Mexico tariff on India: अमेरिका ने पहले ही भारतीय सामानों के आयात पर 50 परसेंट का भारी-भरकम टैरिफ लगा रखा है. इसमें से 25 परसेंट टैरिफ रूस से तेल की खरीद को लेकर पेनाल्टी के तौर पर लगाया है. इसी क्रम में अब मेक्सिको ने भी भारत समेत कई एशियाई देशों पर 50 परसेंट टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है.

मेक्सिको की सीनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है. मेक्सिको के इस तरह से टैरिफ बढ़ाने का मकसद अपने यहां की लोकल इंडस्ट्री को मजबूत बनाना है. मेक्सिको के इस फैसले के चलते ऑटो, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, कपड़े, प्लास्टिक और स्टील पर 50 परसेंट तक टैरिफ लगाया जाएगा. इसके अलावा भी ज्यादातर सामानों पर टैरिफ को बढ़ाकर 35 परसेंट तक किया जा सकता है. 

पहले 1400 सामानों पर टैरिफ बढ़ाने का था प्रस्ताव

हालांकि, सीनेट में पास हुए इस प्रस्ताव में पहले वाले ड्राफ्ट के मुकाबले थोड़ी नरमी बरती गई है, जिसमें लगभग 1,400 इंपोर्ट लाइनों पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही गई थी. नए प्रस्ताव में इनमें से दो-तिहाई पर ड्यूटी कम कर दी गई है. खास बात यह है कि यह कदम चीन और लोकल बिजनेस ग्रुप्स के विरोध के बावजूद उठाया गया है, जो मेक्सिको की ट्रेड पॉलिसी में बदलाव का संकेत देता है क्योंकि इसे आने वाले यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) रिव्यू का सामना करना पड़ेगा, जो 1 जुलाई 2026 से शुरू होगी. 

क्या है USMCA?

USMCA अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है, जो 1 जुलाई 2020 से लागू हुआ. समझौते के आर्टिकल 34.7 के मुताबिक, हर छह साल में इसका रिव्यू होना जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह तीनों ही देशों के लिए फायदेमंद है. अगर समीक्षा में यह खरा उतरता है तो इसे 2036 तक बढ़ाया जा सकता है.

लोकल इंडस्ट्रीज पर कम होगा दबाव

मेक्सिको की सरकार का कहना है कि इस कदम से घरेलू इंडस्ट्री मजबूत होगी क्योंकि सस्ते आयात के चलते स्थानीय कंपनियों पर दबाव कम होगा. लेकिन इससे उन देशों के एक्सपोटर्स और लोकल बिजनेस ग्रुप्स को करारा झटका लगेगा, जो टैरिफ के इतने बढ़ने की उम्मीद नहीं कर रहे थे. मेक्सिको के टैरिफ बढ़ाने पर आयात की लागत काफी बढ़ जाएगी. इसका असर खासतौर पर उन देशों पर ज्यादा पड़ेगा, जिनका मेक्सिको के साथ कोई ट्रेड डील नहीं है जैसे कि चीन, भारत, साउथ कोरिया, थाइलैंड, इंडोनेशिया. 

 

 

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