Income Tax Return Filing 2026: इलाज पर हुए खर्च को लेकर हमारे मन में कई सवाल रहते हैं जैसे कि क्या पुराने एम्प्लॉयर से मिलने वाला मेडिकल रीइम्बर्समेंट टैक्सेबल है, क्या बिना रीइम्बर्स हुए मेडिकल खर्च सेक्शन 80D के तहत डिडक्शन के लिए योग्य हैं और क्या वे एम्प्लॉयर द्वारा फंड की गई सुपरएनुएशन पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का क्लेम कर सकते हैं? 

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आपको बता दें कि आयकर अधिनियम की धारा 80D के तहत आप मेडिकल खर्चों का क्लेम कर सकते हैं. हालांकि, इसकी कुछ शर्तें हैं. पहली शर्त तो खर्च किसी वरिष्ठ नागरिक के इलाज पर किए गए हो, जिनकी उम्र 60 साल या उससे अधिक हो. दूसरी शर्त यह कि उनके नाम पर कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी न हो. 

क्या है 80D के तहत क्लेम करने के नियम?

इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, बिना इंश्योरेंस वाले किसी सीनियर सिटीजन के मेडिकल ट्रीटमेंट पर किए गए खर्च पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है. हालांकि, कुछ बातों का ध्यान रखना होगा. आयकर अधिनियम की भाषा में इसे 'Medical Expenditure on Senior Citizen' कहा जाता है.

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माता-पिता के लिए क्लेम

माता-पिता की उम्र 60 साल या उससे अधिक होनी चाहिए ओर उनके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं होना चाहिए. आप उनके इलाज पर हुए खर्च के लिए सालाना 50000 रुपये तक क्लेम कर सकते हैं. माता-पिता के लिए यह जरूरी नहीं है कि वे आर्थिक रूप से आप पर निर्भर हैं. अगर उनकी खुद की पेंशन या कमाईहै, तब पर भी आप उनके मेडिकल बिल या इंश्योरेंस का प्रीमियम अपने बैंक अकाउंट से चुकाते हैं, तो आप टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं.

खुद के या जीवनसाथी के लिए क्लेम

अगर आप या आपका पति या पत्नी सीनियर सिटीजन की कैटेगरी में आते हैं और आपके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं है, तो भी आप अपने और अपने परिवार के मेडिकल खर्चों पर 50000 रुपये प्रति वर्ष क्लेम कर सकते हैं. 

भुगतान का क्या हो तरीका?

हॉस्पिटल बिल या दवाइयों का खर्च केवल डिजिटल मोड जैसे कि यूपीआई, क्रेडिट या डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए ही होना चाहिए. नगद में किए गए भुगतान पर आयकर विभाग कोई छूट नहीं देता है. 

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