आज 6 सितंबर 2026 को भारत में घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं. आम जनता और घरेलू रसोई बजट को राहत देते हुए सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs)  ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है. जबकि कमर्शियल इस्तेमाल वाले 19 किलोग्राम के बड़े गैस सिलेंडरों की कीमतों में 1 सितंबर को 9.50 से 11.50 रुपये प्रति सिलेंडर की मामूली बढ़ोतरी की जा चुकी है. इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग बिजनेस पर पड़ रहा है. 

Continues below advertisement

क्यों नहीं बढ़ाए गए घरेलू सिलेंडर के रेट?

 वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है. हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल जाने और आयात लागत बढ़ने की वजह से कमर्शियल गैस के दाम बढ़ाए गए हैं.

शहरवार LPG की कीमत

शहरघरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली942.002,747.50
मुंबई941.502,701.00
कोलकाता968.002,884.00
चेन्नई957.502,916.50
बेंगलुरु944.502,831.00
लखनऊ942.502755.00
नोएडा 942.802760.00
वाराणसी943.102757.00
रांची999.502,933.00

कब-कब बढ़ाई गईं गैस सिलेंडर की कीमत?

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में आखिरी बदलाव जून 2026 में हुआ था. उस समय, 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 29 रुपये बढ़ाई गई थी. उससे पहले, मार्च में पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू LPG की कीमत में लगभग 60 रुपये का इजाफा किया गया था. वहीं, 1 सितंबर को रेट बढ़ाए जाने से पहले पहले 1 अगस्त को कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में लगभग 192 से 200 की बड़ी कटौती की गई थी. जुलाई में भी इसकी कीमत में लगभग 183.50 रुपये की कमी आई थी.

Continues below advertisement

LPG का घट रहा इस्तेमाल

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत में घरेलू LPG की खपत 15.9% घटकर 11.3 मिलियन टन रह गई. पिछले साल इसी अवधि में घरेलू LPG की खपत 13.4 मिलियन टन थी.

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत में घरेलू LPG की खपत 15.9% घटकर 11.3 मिलियन टन रह गई. पिछले साल इसी अवधि में घरेलू LPG की खपत 13.4 मिलियन टन थी. इसकी कई वजहें हैं जैसे कि देश में तमाम शहरों और कस्बों में तेजी से फैल रहा PNG नेटवर्क घरेलू सिलेंडर की निर्भरता को कम कर रहा है.

बेशक, पिछले कुछ समय से कीमतें स्थिर हैं, लेकिन 940 से 1000 रुपये के बीच का मौजूदा बेस प्राइस ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बजट पर असर डाल रहा है. वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ परिवार सब्सिडी खत्म होने या कम होने के बाद दोबारा पारंपरिक ईंधन (जैसे लकड़ी या उपले) की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे एलपीजी के इस्तेमाल में कमी आई है.

ये भी पढ़ें:

आज रविवार को पेट्रोल-डीजल के क्या चल रहे भाव, कितने में टंकी हो जाएगी फुल?