LPG Price Cut: साल का आखिरी महीना दिसंबर आज से शुरू हो चुका है और पहले ही दिन देश की करोड़ों जनता को खुशखबरी मिली है. दरअसल, आज से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर (कुकिंग गैस) की कीमत कम हो रही है.
इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, 19 किलो वाले कुकिंग गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 10 रुपये की कमी की गई है. इस क्रम में 1 दिसंबर, 2025 से दिल्ली और कोलकाता में LPG की कीमतों में 10-10 रुपये की कटौती की गई है, जबकि मुंबई और चेन्नई में दाम 10.5 रुपये घटाए गए हैं. आइए देश के अलग-अलग शहरों में सिलेंडर के रिवाइज्ड रेट पर एक नजर डालते हैं:-
- दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,590.50 रुपये से घटकर अब 1,580.50 रुपये हो गई है.
- मुंबई- मुंबई में कीमत पिछले महीने के 1,542 रुपये से घटकर अब 1,531.50 रुपये हो गई है.
- कोलकाता- यहां भी कमर्शियल सिलेंडर की कीमत पिछले महीने के 1,694 रुपये से 10 रुपये कम होकर अब 1,684 रुपये हो गई है.
- चेन्नई- यहां कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 1,750 रुपये से घटकर 1,739.50 रुपये हो गई है.
घरेलू LPG सिलेंडर के रेट
भारत में इस महीने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इंडियन ऑयल के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर 853 रुपये में मिल रहा है, वहीं मुंबई में इसकी कीमत 852.50 और लखनऊ में 890.50 रुपये है. कोलकाता में LPG सिलेंडर LPG सिलेंडर 879 रुपये और चेन्नई में 868.50 रुपये में मिल रहे हैं.
कैसे तय होती हैं एलपीजी की कीमतें?
LPG की कीमतें हर महीने फ्यूल रिटेलर बदलते हैं. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) आम तौर पर हर महीने की पहली तारीख को कुकिंग गैस की कीमतें एडजस्ट करते हैं.
भारत में, LPG की कीमतें 'इम्पोर्ट पैरिटी प्राइस' (IPP) मॉडल के आधार पर तय होती हैं, जिसमें इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें, डॉलर-टू-रुपया एक्सचेंज रेट, फ्रेट चार्ज, इंश्योरेंस, कस्टम ड्यूटी और दूसरे टैक्स शामिल होते हैं.
इसके अलावा, रिफाइनरी और डिपो से शहर के विभिन्न हिस्सों या दूर-दराज के इलाकों तक गैस पहुंचाने की लागत अलग-अलग होती है इसलिए इटैक्स और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट अलग-अलग होने के चलते LPG की कीमतें भी हर राज्य में भिन्न होती हैं. आमतौर पर पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों में गैस पहुंचाने की लागत ज्यादा होती है इसलिए उन इलाकों में कीमतें बढ़ जाती हैं.
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