मंगलवार की शाम ही केंद्र सरकार ने यूपीआई के नियमों में बदलाव किया है. जिसके बाद अब 2000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का चार्ज लगेगा. ये चार्ज व्यापारियों या कारोबारियों को देना होगा. आम ग्राहकों के लिए कोई चार्ज नहीं है. हालांकि इसी बीच कुछ छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के बीच ये सवाल उठ रहा है कि क्या इस बदलाव के बाद उन्हें अपना पुराना QR कोड और साउंड बॉक्स बदलना होगा? तो आइये जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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क्या बदलना होगा QR कोड?दरअसल इस नए नियम को लागू करने के बाद NPCI ने इससे जुड़े सवालों के जवाब भी दिए, जो लोगों के मन में आए होंगे. इस FAQ में ही इस बारे में भी बताया गया है कि छोटे दुकानदारों को अपना मौजूदा QR कोड या साउंड बॉक्स बदलना होगा या नहीं. इसका जवाब है- नहीं.

छोटे व्यापारियों को अपने मौजूदा QR कोड को बदलने, दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने या नया QR लेने की जरूरत नहीं होगी. उनका मौजूदा यूपीआई QR कोड पहले की तरह काम करता रहेगा. इसी तरह दुकानों पर लगे साउंड बॉक्स को भी बदलने की जरूरत नहीं होगी.

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मौजूदा साउंड बॉक्स कर सकते हैं उपयोगइसका मतलब है कि किसी दुकान पर पहले से लगा हुआ साउड बॉक्स भी बदलने की जरूरत नहीं है. व्यापारी ग्राहकों से UPI के जरिए पैसे लेने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम का इस्तेमाल कर सकेंगे. उन्हें केवल नए शुल्क से जुड़े नियमों का ध्यान रखना होगा.

MDR पेमेंट पर लगेगा चार्जबता दें कि NPCI के नए नियमों के तहत ये बदलाव 15 अक्टूबर से लागू होंगे. जिसमें 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने वाला है. ये शुल्क व्यापारी या कारोबारियों से ही से लिया जाएगा. हालांकि 2000 रुपये तक के छोटे UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. MDR की दर 0.4% बताई गई है और हर ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी.

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