Aviation News: विदेशों में कई जगहों पर ऐसा सिस्टम है कि जो कंपनी एयरपोर्ट को चला रही है उसके पास अपनी एक एयरलाइंस भी है. ये सिस्टम अब तक भारत में नहीं देखा गया है. ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल भी उठता है कि क्या ऐसा हो सकता है, कि जो कंपनी एयरलाइन चला रही है वही कंपनी एयरपोर्ट का संचालन भी कर सकती है? इस बारे में खुद भारत सरकार ने खुलासा किया है.

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दरअसल हाल ही में संसद के मानसून सत्र में सरकार ने इस बारे में जवाब दिया है. सरकार के मुताबिक हां! जो कंपनी एयरपोर्ट का संचालन कर रही है, वो अपनी एयरलाइन भी चला सकती है. हालांकि, इसके लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है.

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सदन में दिया लिखित जवाबसरकार की तरफ से मंगलवार को संसद में लिखित जवाब देते हुए बताया गया कि, ऐसा कोई नियम नहीं है, जो एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियों को शेड्यूल्ड एयरलाइन का मालिक बनने या उसे चलाने से रोकता हो. लेकिन कुछ एयरपोर्ट के कॉन्ट्रैक्ट में क्रॉस-होल्डिंग से जुड़े नियम हैं. इन नियमों के कारण एयरपोर्ट ऑपरेटर किसी एयरलाइन में तय सीमा से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं खरीद सकता, जब तक उसे विशेष छूट यानी Waiver न मिल जाए.

क्या कहते हैं नियम?सरकार की तरफ से एयरपोर्ट ऑपरेटरों पर एयरलाइन रखने की कोई सीधी रोक नहीं है. लेकिन कुछ PPP मॉडल वाले एयरपोर्ट के समझौतों में ऐसी शर्तें हैं, जो एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी को किसी शेड्यूल्ड एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी लेने से रोकती हैं. इसी वजह से कुछ कंपनियों को एयरलाइन कारोबार में उतरने के लिए अपने कॉन्ट्रैक्ट में मौजूद इस शर्त से छूट लेने की जरूरत पड़ सकती है.

सरकार ने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को क्रॉस-होल्डिंग नियमों में छूट देने का एक अनुरोध मिला है. हालांकि, इस प्रस्ताव पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अभी कोई फैसला नहीं किया है. सरकार ने अपने जवाब में ये नहीं बताया कि ये अनुरोध किस कंपनी ने किया है.

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क्यों सदन में हुई ये चर्चाबता दें कि पिछले महीने ही ऐसी खबरें आई थीं कि अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने अपने एयरपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट में मौजूद क्रॉस-होल्डिंग नियमों से छूट मांगी है. जिसके बाद कहा जा रहा था कि अब अडानी समूह अपनी एयरलाइंस लेकर आ रहा है. इस वजह से सरकार का ये फैसला मायने रखता है. हालांकि बाद में अडानी समूह की तरफ से इस तरह की बातों का खंडन किया गया, उन्होंने बताया कि छूट का अनुरोध केवल उसके एयरपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट में मौजूद क्रॉस-होल्डिंग नियमों से जुड़ा था, एयरलाइन शुरू करने पर कोई चर्चा नहीं हो रही है.