Joint Bank Account Rules: दो लोगों के बीच वित्तीय लेनदेन को आसान बनाने के लिए कई लोग ज्वाइंट बैंक अकाउंट खोलना पसंद करते हैं. जिसमें पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चे या अन्य भरोसेमंद सदस्य शामिल हो सकते हैं. ऐसे खाते की खासियत यह होती है कि दो लोग एक ही अकाउंट को सुविधाजनक तरीके से इस्तेमाल करते हैं.

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हालांकि जॉइंट बैंक अकाउंट शुरू करने से पहले इसके नियम, अधिकार और जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है. ताकि आगे चलकर किसी तरह की परेशानी न हो. आइए जानते हैं,  जॉइंट अकाउंट से जुड़े अहम पहलुओं के बारे में....

जॉइंट बैंक अकाउंट में ऑपरेटिंग मोड को समझना जरूरी

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जॉइंट बैंक अकाउंट खुलवाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उसका ऑपरेटिंग मोड होता है. इसी के आधार पर यह तय होता है कि खाते को कौन और कैसे ऑपरेट करेगा. बैंक आमतौर पर इसके लिए अलग-अलग विकल्प देते हैं. ‘Either or Survivor’ मोड में दोनों खाताधारकों में से कोई भी व्यक्ति अकेले अकाउंट का इस्तेमाल कर सकता है और पैसे निकाल सकता है.

वहीं ‘Jointly’ विकल्प में हर ट्रांजैक्शन के लिए दोनों लोगों की सहमति और हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. जिससे सुरक्षा तो बढ़ती है लेकिन प्रोसेस थोड़ा धीमा हो सकता है. इसके अलावा ‘Former or Survivor’ मोड में मुख्य खाताधारक के जीवनकाल में वही खाते का संचालन करता है.

जॉइंट अकाउंट में अक्सर लोग ‘Either or Survivor’ विकल्प को चुनते हैं, क्योंकि इसमें सुविधा ज्यादा होती है. इसमें आपात स्थिति में किसी एक व्यक्ति द्वारा तुरंत पैसा निकाला जा सकता है. हालांकि इस सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है, क्योंकि दोनों में से कोई भी बिना दूसरे की अनुमति के लेनदेन कर सकता है.

किसकी होती है जिम्मेदारी?

जॉइंट बैंक अकाउंट खोलते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि, बैंक अकाउंट को लेकर दोनों की जिम्मेदारी बराबरी की होती है. अगर ओवरड्राफ्ट हो, चेक बाउंस हो जाए या फिर लोन को लेकर कोई परेशानी आए तो इसका असर दोनों व्यक्तियों पर पड़ता है. इसलिए जॉइंट खाता खोलते समय इस बात पर चर्चा जरूर कर लेनी चाहिए. 

नॉमिनी बनाना ना भूलें

लोगों के मन में ऐसा विचार आता है कि, जॉइंट अकाउंट में नॉमिनी की क्या जरूरत है. हालांकि, दुर्भाग्य से दोनों खाताधारकों को कुछ हो जाता है तो पैसों की निकासी कानूनी दांव पेंच में फंस सकती है. इसलिए जरूरी है कि खाता खुलवाते समय ही नॉमिनी का नाम दर्ज करवा दें.   

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