बीमा पॉलिसी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में नियमों में कुछ अहम बदलाव हो सकते हैं. भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा कंपनियों के खर्च, एजेंटों के कमीशन और पॉलिसी बेचने की प्रक्रिया को लेकर नए प्रस्ताव जारी किए हैं.

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इनका मकसद बीमा की लागत को नियंत्रित करने के साथ बिक्री प्रक्रिया में स्पष्टता बढ़ाना और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने की शिकायतों पर लगाम लगाना है.

बीमा कंपनियों के खर्च की सीमा घटाने का प्रस्ताव

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IRDAI ने लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए (EoM) की सीमा कम करने का सुझाव दिया है. प्रस्ताव के अनुसार,कंपनियों को दो साल में अपना EoM (GDPI) के 15 फीसदी और पांच साल में 12.5 फीसदी तक लाना होगा.

जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के मामले में EoM की गणना के लिए ग्रोस रिटिन प्रिमियम की जगह घरेलू GDPI को आधार बनाने का प्रस्ताव है. पांच साल में इसकी सीमा 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने की बात कही गई है.

पॉलिसी के हिसाब से तय होगा कमीशन

नए प्रस्ताव में सभी तरह की पॉलिसी के लिए एक जैसा कमीशन रखने के बजाय उत्पाद,अवधि, बिक्री चैनल और पॉलिसी बेचने में लगने वाली मेहनत को ध्यान में रखने की बात कही गई है. इंडिविजुअल नॉन-लिंक्ड और लिंक्ड पॉलिसी में इंटरमीडियरी का कमीशन 5 से 20 फीसदी, जबकि एजेंटों का 6.25 से 25 फीसदी तक रखने का प्रस्ताव है. प्योर टर्म प्लान में पहले साल इंटरमीडियरी को 25 फीसदी और एजेंट को 30 फीसदी तक कमीशन मिल सकता है.

हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस के लिए भी नए नियम

इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस की नई बिक्री पर डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए करीब 15 फीसदी और एजेंटों के लिए 20 फीसदी कमीशन प्रस्तावित है. रिन्यूअल पर यह 5 फीसदी और 10 फीसदी रहेगा. मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए कमीशन शून्य रखने का प्रस्ताव है, जबकि एजेंटों और एसोसिएट्स को 2.5 फीसदी तक मिल सकता है.

लोन के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक

IRDAI ने लोन या क्रेडिट के साथ बीमा को अनिवार्य रूप से जोड़ने की व्यवस्था पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है. साथ ही, बैंक और NBFC कर्मचारियों को बीमा बेचने के लिए बिक्री की संख्या या रिवॉर्ड से जुड़े इंसेंटिव देने पर भी रोक का सुझाव है.

इसके अलावा, बीमा कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपनी कमीशन नीतियों और स्ट्रक्चर की जानकारी आसान भाषा में सार्वजनिक करनी होगी. खर्चो की निगरानी के लिए कुछ मामलों में कोस्ट ओडिट अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है.

मिस-सेलिंग पर बढ़ेगी जवाबदेही

नियामक ने पॉलिसी को बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को संबंधित पॉलिसी से जोड़ने और मिस-सेलिंग से जुड़े मामलों की जानकारी सार्वजनिक करने का सुझाव दिया है. गलत तरीके से पॉलिसी बेचने की स्थिति में कमीशन वापस लेने यानी क्लोबेक का प्रावधान भी प्रस्तावित है.

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