Iran Hormuz News: तेल की सप्लाई पर संकट! क्या ईरान वसूलेगा जहाजों से टैक्स? भारत का स्टैंड साफ
Middle East Tension: मिडिल ईस्ट तनाव और ईरान के टोल विवाद के बीच भारत ने साफ तौर पर अपनी बात रखी हैं. आइए जानते हैं, सरकार का इस विवाद पर क्या है रूख?

- देश ऊर्जा आयात के लिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर निर्भर है।
Iran Toll Issue: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल लगाने की चर्चाओं के बीच भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. भारत का कहना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट और सुरक्षित तरीके से जारी रहनी चाहिए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है.
समुद्री रास्ते पर भारत का रुख साफ
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर अब तक दोनों देशों के बीच कोई ऑफिशियल बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी पुरानी नीति पर कायम है. साथ ही आगे की स्थिति को देखते हुए फैसले लिए जाएंगे.
मिडिल ईस्ट और होर्मुज पर Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और बिना किसी बाधा के जारी रहनी चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पहले भी इस मुद्दे पर अपनी बात रख चुका है और अब भी उसी रुख पर कायम है.
टोल को लेकर सरकार का बयान
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लिए जाने की बात कई जगहों पर कही जा रही है. हालांकि, भारत ने यह साफ किया है कि भारत के झंडे वाले जहाजों ने ऐसा कोई भुगतान नहीं किया है. युद्ध के बाद अब तक भारत के आठ एलपीजी टैंकर इसी रास्ते से वापस लौट चुके हैं.
ऊर्जा जरूरतों पर निर्भरता
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग भारत के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेस्ट एशिया पर काफी हद तक निर्भर है. तेल-गैस की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है. साथ ही, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल जैसे चीजों के लिए भारत इस रास्ते पर निर्भर है.
पूरी दुनिया का 20 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से होकर गुजरती है. इसलिए भारत समेत अन्य देश जो मिडिल ईस्ट देशों पर ऊर्जा के लिए निर्भर है, उन सभी देशों के लिए इस रास्ते का खुले रहना बहुत जरूरी है.
क्या प्राकृतिक जलमार्गों पर लगता है टोल?
United Nations के समुद्री नियम (UNCLOS) के मुताबिक ज्यादातर प्राकृतिक जलमार्गों पर शुल्क नहीं लिए जाते है. नेचर की वजह से इन्हें अंतरराष्ट्रीय मार्ग माना जाता है. हालांकि, इनमें कुछ अपवाद भी मौजूद है. विशेष समझौते के तहत तुर्की शुल्क वसूलता है.
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Source: IOCL

























