Strait of Hormuz: बीते कुछ महीनों से जबसे ईरान और यूएस के बीच युद्ध शुरू हुआ था, तभी से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक था. हाल ही में युद्ध विराम के बाद लोगों ने राहत की सांस ली ही थी, कि अब एक बार फिर से लगता है महंगाई की मार लोगों पर पड़ेगी. क्योंकि अमेरिका से युद्ध खत्म होने के बाद ईरान अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपना कमाई का नया जरिया बनाने वाला है. आइये जानें कैसे.

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होर्मुज कैसे बनेगा ईरान की कमाई का जरिया?दरअसल द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव करना चाहता है. इसके लिए उसने एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा, सुरक्षित नौवहन और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवाओं के बदले फीस ली जाएगी. अगर ये प्लान लागू होता है तो इसमें शामिल देशों को हर साल करीब 40 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है.

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क्या बोला ईरान?इसे लेकर ईरान का कहना है कि हालिया युद्ध के बाद अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संचालन पहले की तरह नहीं चल सकता. इसलिए एक नई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें खाड़ी के देश मिलकर इस समुद्री रास्ते का मैनेजमेंट करें और फीस से होने वाली कमाई आपस में बांटें. जिससे ईरान और उससे जुड़े देशों की आय वृद्धि होगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस योजना को लागू करने के लिए चीन और खाड़ी के अन्य देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. ईरान के चीफ नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अपने ओमान दौरे के दौरान कहा कि होर्मुज का मैनेजमेंट अब पुराने तरीके से नहीं होगा. ईरान ने ये मॉडल टर्की के स्ट्रोट ऑफ डार्डानेल्स से इंस्पायर होकर तैयार किया है.

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क्या पड़ेगी महंगाई की मार?यदि ईरान का ये प्रस्ताव पास हो जाता है तो आने वाले समय में अन्य देश जहां पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कच्चे तेल और गैस का निर्यात होता है, वहां महंगाई बढ़ सकती है. जिसमें से एक भारत भी है, जहां ईरान- अमेरिका के बीच युद्ध का भी सीधा असर पड़ा था. यहां पर कच्चे तेल की कमी के कारण पेट्रोल- डीजल और गैस की किल्लत देखी गई. तो वहीं इनके दामों में भी इजाफा हुआ था.

विरोध में है अमेरिकाबता दें कि अमेरिका ने ईरान के इस प्रस्ताव का विरोध किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि किसी भी देश को इंटरनेशनल जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से फीस लेने का कोई अधिकार नहीं है और अमेरिका ऐसी किसी व्यवस्था का समर्थन नहीं करेगा. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि हाल ही में हुए 60 दिन के युद्धविराम समझौते के तहत ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी और जहाजों की आवाजाही बिना किसी टोल के जारी रखनी होगी.