Infosys: देश की बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस अपने वर्कर्स से यह जानने की कोशिश में जुटा है कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान बिजली की खपत कितनी हो रही है. इसका मकसद 15 साल से ज्यादा समय से चल रहे सस्टेनेबिलिटी प्रोग्राम के तहत ज्यादा क्लीन एनर्जी का उत्पादन कर बिजली की ज्यादा खपत के असर को कम करना है. कहीं न कहीं इस सर्वे का मकसद एनर्जी बचाने के साथ-साथ  बिजली के सही इस्तेमाल के बारे में जागरूकता भी बढ़ाना है.

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हाइब्रिड मोड में काम कर रहे वर्कर्स

इंफोसिस में अभी हाइब्रिड वर्क पॉलिसी लागू है. इसके तहत, अधिकतर कर्मचारियों को महीने में कम से कम 10 दिन ऑफिस से काम करना होता है और बाकी दिन सभी घर से काम करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इंफोसिस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) जयेश संघराजका ने कर्मचारियों को ईमेल के जरिए बताया कि कंपनी ने वर्क-फ्रॉम-होम के दौरान बिजली के इस्तेमाल का सर्वे शुरू किया है और उनसे कुछ मिनट निकालकर इस पर जवाब देने के लिए कहा है.

CFO ने क्या कहा? 

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में CFO के हवाले से कहा गया है, "हाइब्रिड वर्क हमारे ऑपरेशंस का एक जरूरी हिस्सा बन गया है इसलिए हमारे काम का एनवायरनमेंट पर असर हमारे कैंपस से बाहर हमारे घरों तक फैल रहा है. घर से काम करते समय इस्तेमाल होने वाली बिजली भी इंफोसिस के ग्रीनहाउस गैस एमिशन फुटप्रिंट में योगदान दे रही है. जैसे-जैसे हम अपनी रिपोर्टिंग मेथोडोलॉजी को बेहतर और अपडेट कर रहे हैं, घर से काम करने के दौरान मौजूदा एनर्जी के इस्तेमाल पर सटीक डेटा हासिल करना हमारे लगातार प्रयासों के लिए जरूरी है."

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रिपोर्ट के मुताबिक, इंफोसिस के बेंगलुरु ऑफिस में 300000 से ज्यादा कर्मचारी हैं. ऑफिस की तरफ से बताया गया कि सस्टेनेबिलिटी हम सभी की जिम्मेदारी है. CFO ने यह भी कहा कि कंपनी ने अपनी उपलब्धियों से अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. इसने इंटरनेशनल डेडलाइन से पहले कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल की है, 2008 से प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत में 55 परसेंट की कमी की है और पिछले साल अपनी लगभग 77 परसेंट बिजली रिन्यूएबल सोर्स से हासिल की है.

 

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