Indian Rupee: फरवरी से शुरू हुआ ईरान और यूएस का युद्ध अब तक भी जारी है. जिसका खामियाजा भारत की अर्थव्यवस्था को भी चुकाना पड़ रहा है. इस युद्ध के कारण डॉलर के सामने रुपया गिरता ही जा रहा है. कच्चे तेल की महंगाई, विदेशी निवेश भी इसके पीछे की बड़ी वजह है. भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से का तेल विदेश से आयात करता है, इसलिए डॉलर की मांग बढ़ने पर रुपये पर दबाव आता है.
तो वहीं अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से निवेशक डॉलर की तरफ आकर्षित होते हैं, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी में कमजोरी देखने को मिलती है. ऐसे में भारत का रुपया भी लगातार कमजोर होता जा रहा है.
12 साल में इतनी आई रुपया में गिरावट
- साल 2014 में 1 डॉलर भारतीय रुपया के 58.94 रुपये के बराबर था.
- साल 2019 में रुपया 17% से ज्यादा गिरकर 69.37 प्रति डॉलर हो गया.
- जून 2024 में डॉलर के मुकाबले रुपया 83.38 पर पहुंच गया था.
- साल 2026 में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 96 रुपये तक पहुंच गया है.
- पिछले दो सालों में रुपये में लगभग 14.75% की गिरावट आई है.
- कुल मिलाकर 12 साल में रुपया डॉलर के मुकाबले 62.33% कमजोर हुआ है.
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पाकिस्तानी रुपया कैसे बना हुई है स्टेबलजहां एक तरफ भारतीय रुपया गिरता ही जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी रुपया पिछले छह महीनों में डॉलर के मुकाबले 1.31% मजबूत हुआ है. फिलहाल में अभी 1 डॉलर की कीमत करीब 278 पाकिस्तानी रुपये है. पाकिस्तान में इ दिनों में विदेशी मुद्रा की स्थिति कुछ बेहतर हुई है. मार्च तिमाही में करंट अकाउंट सरप्लस रहने से डॉलर पर दबाव कम हुआ. इसके अलावा सऊदी अरब की वित्तीय मदद और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में वापसी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.
सेंचुरी फाइनैंशियल के CIO विजय वलेचा ने दुबई के खलीज टाइम्स का कहना है कि रुपये की स्थिरता की बड़ी वजह घरेलू अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि बाहरी समर्थन और बेहतर हालात हैं. अगर तेल की कीमतें काबू में रहीं, विदेशी मुद्रा भंडार और रेमिटेंस बढ़ते रहे, तो पाकिस्तानी रुपया आगे भी मजबूत रह सकता है.
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अन्य एशियाई देशों का हाल
थाईलैंडथाईलैंड की करेंसी का नाम बाट है, ये एशिया की मजबूत प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में रही है. जनवरी में बाट 31 प्रति डॉलर से नीचे पहुंचा, जो जून 2021 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर था. एक साल में बाट में 10% से ज्यादा मजबूती आई है. थाईलैंड के करंट अकाउंट सरप्लस और अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार सरप्लस ने मुद्रा को सहारा दिया. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज बढ़ोतरी भी इसकी बड़ी वजह रही. नरम मौद्रिक नीति के बावजूद थाई बाट मजबूत बना रहा.
चीनचीन या चाइना की करेंसी रेनमिन्बी (युआन) डॉलर के मुकाबले तीन साल के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंची. पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने मई में युआन की डेली फिक्सिंग 6.8467 प्रति डॉलर तय की. अमेरिका और यूरोप चीन पर अपनी मुद्रा को कमजोर रखने का आरोप लगाते रहे हैं. गोल्डमैन सैश के मुताबिक युआन अब भी करीब 20% डीवैल्यूड है और आगे मजबूत हो सकता है.
सिंगापुरसिंगापुर के डॉलर में पिछले पांच महीनों में करीब 1% मजबूती आई. अभी 1 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1.28 सिंगापुर डॉलर देने होते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में उछाल से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई. पहली तिमाही में सिंगापुर की जीडीपी में 6% की वृद्धि रही. अप्रैल में गैर-तेल घरेलू निर्यात 24.5% बढ़ा, जो 2012 के बाद सबसे तेज वृद्धि थी. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 66.7% की तेज़ बढ़त दर्ज की गई.
