Indian Currency: अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय करेंसी पर देखने को मिल रहा है. इस साल अब तक रुपया 3.54% टूट चुका है, जिससे यह एशिया की दूसरी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है. रुपये की गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं- विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव.

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आज भी गिरा रुपया

बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया 15 पैसे फिसलकर 88.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, यूएस-इंडिया ट्रेड डील को लेकर बनी उम्मीद ने रुपये को कुछ हद तक सपोर्ट दिया, लेकिन डॉलर की मजबूती के कारण दबाव बना रहा.

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 88.61 पर खुला, और बाद में 15 पैसे टूटकर 88.65 पर आ गया. एक दिन पहले, यानी मंगलवार को रुपया 88.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.06% बढ़कर 99.50 पर पहुंच गया. डॉलर की मजबूती से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है.

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क्या कहते हैं बाजार के जानकार?

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि एक दिन पहले यानी मंगलवार को रुपये में जो तेजी देखी गई, उसके पीछे मुख्य वजह वैश्विक बाजारों में जोखिम उठाने की बढ़ी प्रवृत्ति और डॉलर की कमजोरी रही. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार के ‘शटडाउन’ के जल्द खत्म होने की उम्मीदों ने ग्लोबल मार्केट के सेंटिमेंट को मजबूत किया है.

अनुज चौधरी ने कहा कि आने वाले सत्रों में वैश्विक बाजारों में तेजी और डॉलर में कमजोरी के कारण रुपये का रुख कुछ हद तक सकारात्मक रह सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और आयातकों की डॉलर मांग रुपये की बढ़त को सीमित कर सकती हैं. वहीं, HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का मानना है कि रुपये में हाल की मजबूती का प्रमुख कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं.

शेयर बाजार में दिखी रफ्तार

हालांकि, अमेरिकी शटडाउन के जल्द खत्म होने की उम्मीदों ने भारतीय शेयर बाजार में तेजी का माहौल बनाया है.

  • सेंसेक्स 502.82 अंक की छलांग लगाकर 84,374.14 अंक पर पहुंच गया.
  • निफ्टी 50 भी 144.05 अंक की बढ़त के साथ 25,839 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.

इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 0.26% घटकर 65 डॉलर प्रति बैरल पर रहा. वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को 803 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ा.

क्यों कमजोर हुआ रुपया

  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
  • क्रूड ऑयल में उतार-चढ़ाव

 भारतीय रुपया फिलहाल दबाव में है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यूएस-इंडिया ट्रेड डील और घरेलू बाजार की मजबूती के चलते आने वाले हफ्तों में करेंसी में थोड़ी स्थिरता लौट सकती है.

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