Dollar vs Rupee: भारतीय शेयर बाज़ार में मजबूती के बावजूद रुपये में गिरावट का दबाव बना हुआ है. पिछले शुक्रवार को तीन साल की अवधि में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करने के बाद, इस हफ्ते भले ही थोड़ी रिकवरी दिखाई दी हो, लेकिन कमजोरी फिर लौट आई. 28 नवंबर की शुरुआत में ही रुपया 7 पैसे गिरकर 89.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने रुपये को कमजोर किया है. इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 89.41 प्रति डॉलर पर खुला, और शुरुआती कारोबार के दौरान और फिसलकर 89.43 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया. यह पिछली बंद कीमत की तुलना में 7 पैसे की गिरावट दर्शाता है. इससे एक दिन पहले रुपया 14 पैसे टूटकर 89.36 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. इस बीच, डॉलर इंडेक्स भी 0.04% की बढ़त के साथ 99.56 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर की वैश्विक स्थिति मजबूत बनी रही.
रुपये पर दबाव
एलकेपी सिक्योरिटीज के जिंस और मुद्रा अनुसंधान विभाग के उपाध्यक्ष जतीन त्रिवेदी ने रुपये की मौजूदा स्थिति पर एक सधी हुई लेकिन साफ-सुथरी तस्वीर खींची है. उनके अनुसार, रुपये का रुख अभी भी कमजोर है, भले ही बाज़ार की ऊपरी सतह पर शेयर सूचकांक लगभग सर्वकालिक उच्च स्तरों के करीब मंडरा रहे हों.
शेयर बाज़ार की यह चमक रुपये को कुछ पल के लिए सहारा देती है—जैसे हवा का हल्का झोंका किसी थके पत्ते को गिरने से पहले थोड़ी देर तैराए रखे. फिर भी, बाहरी दबाव और डॉलर की ताक़त के कारण दिशा वही रहती है: कमजोरी की ओर. त्रिवेदी के मुताबिक, अगले कुछ सत्रों में रुपया 88.75 से 89.55 के बीच झूलने की संभावना है.
शेयर बाज़ार में तेजी
घरेलू बाजारों में रौनक जारी है. बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 91.01 अंक चढ़कर 85,811.39 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 18.85 अंक की हल्की बढ़त के साथ 26,234.55 पर खुला. अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड में भी 0.41% की बढ़त दर्ज की गई और यह 63.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई गुरुवार को बिकवाल रहे थे. उन्होंने कुल 1,255.20 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की, जिसका असर रुपये की धारणा पर भी नज़र आया.
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