Indian Consumer Spending: पिछले 10 सालों में भारतीयों ने अपनी खर्चों की आदतों में जो बदलाव किया है, उसको लेकर एक ताजा रिपोर्ट चौंकाती है. साल 2013 से साल 2023 के दौरान भारतीयों ने हेल्थकेयर और एजूकेशन सेक्टर पर ज्यादा खर्च किया है, जबकि इससे पहले खाने-पीने, कपड़ों और घर पर भारतीयों का ज्यादा फोकस रहा था.

नेशनल अकाउंट स्टैटिस्टिक्स 2024 के आंकड़ों के मुताबिक जानें रुझान

पिछले 10 सालों मे भारतीय कस्टमर्स का ध्यान खान-पान, कपड़ों से ज्यादा सेवाओं की तरफ रहा है. नेशनल अकाउंट स्टैटिस्टिक्स 2024 के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 सालों में भारतीय कंज्यूमर्स भोजन, कपड़े और आवास से हटकर सर्विसेज की ओर ज्यादा खर्च बढ़ा रहे हैं. वित्त वर्ष 2013 और वित्त वर्ष 2023 के बीच निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में आवश्यक वस्तुओं की हिस्सेदारी में गिरावट आई है, जबकि हेल्थकेयर और एजूकेशन सहित अन्य पर हिस्सेदारी बढ़ी है. इसके आधार पर माना जा सकता है कि ये सर्विस इकोनॉमी की तरफ बढ़ती रुचि का इंडीकेटर है.

10 सालों में हेल्थ और एजूकेशन का बढ़ा इतना हिस्सा

10 सालों में हेल्थ पर खर्च 8.2 फीसदी की दर से बढ़ा है और एजूकेशन पर 7.5 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है. इसके दम पर पिछले 10 सालों में निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में कुल मिलाकर औसत 6 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है.

घरेलू खर्चों में होने वाला खर्च घटा

घरेलू खर्चों में होने वाला खर्च 16.4 फीसदी से गिरकर 13 फीसदी पर आ गया है और कपड़ों पर होने वाला खर्च 6.1 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी पर आ गया है. ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 8.2 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है और कम्यूनिकेशन के खर्चों में 7.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है.

टॉप 3 खर्चों वाले एरिया को देखें

टॉप 3 खर्चों वाले एरिया को देखें तो खान-पान में 27.8 परसेंट, ट्रांसपोर्ट सर्विसेज में 9.3 फीसदी, हाउसिंग रेंटल में 9.2 फीसदी, निजी ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन में 6.8 फीसदी और ब्रेड व अनाज के खर्चों में 6.3 फीसदी का खर्च दर्ज किया गया है.

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