Costly Power Tariff Likely: आने वाले दिनों में आपको महंगे बिजली बिल का करंट लग सकता है. क्योंकि बिजली महंगी हो सकती है. दरअसल थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कमी को पूरा करने के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में 76 मिलियन टन कोयले के आयात किए जाने की संभावना है. ऐसा हुआ तो बिजली 50 से 80 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी हो सकती है. जिसक भार आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है.
आयातित कोयले से चलेंगे थर्मल पावर प्लांट!दरअसल मानसून देश में दस्तक दे चुका है. अगस्त और सितंबर में मानसून का असर रहेगा. इस दौरान कोयले के उत्पादन और सप्लाई पर असर रहता है. ऐसे में देश की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया बिजली घरों में कोयले की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए 15 मिलियन टन कोयला आयात करने जा रही है. एनटीपीसी और दामोदर वैली कॉरपोरेशन भी 23 मिलियन टन कोयला आयात करेगी. इसके अलावा राज्यों की बिजली उत्पादन कंपनी और निजी पावर प्रोड्यूसर्स भी 38 मिलियन टन कोयला आयात करेंगी. दरअसल घरेलू उत्पादन अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान कोयले की मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है इसलिए आयात करने का निर्णय लिया गया है.
इंपोर्टेड कोयले से बढ़ेगी लागत कोयले के आयात से पावर उत्पादन करने वाली कंपनियों का लागत बढ़ेगा. जो करीब 50 से 80 पैसे प्रति यूनिट बनता है. वहीं पोर्ट से थर्मल पावर प्लांट की दूरी के आधार पर भी लागत पर असर पड़ सकता है. दरअसल देश में बिजली की मांग बढ़ी है उस मुताबिक घरेलू कोयले का उत्पादन नहीं बढ़ा है और मानसून के दौरान उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन दोनों ही पर असर पड़ता है. देश में ब्लैकआउट्स की संभावना को देखते हुए कोयले का आयात का निर्णय लिया गया है.
कोयले का स्टॉक है कम!देश के पावर प्लाट्स में हर दिन करीब 2.1 मिलियन टन कोयले की खपत है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी पावर प्लाट्स में कोयले के स्टॉक को मॉनिटर करती है जिसके मुताबिक 19 जुलाई को पावर प्लांट्स में 28.40 मिलियन टन कोयले का स्टॉक था जो जरुरी कैपेसिटी 56.92 मिलियन टन का 50 फीसदी है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी जिन 173 पावर प्लाट्स में कोयले के स्टॉक को मॉनिटर करती है उसमें 7 इंपोर्टेड कोल बेस्ड पावर प्लांट और 51 घरेलू कोल बेस्ड पावर प्लांटस में कोयले के स्टॉक की गंभीर स्ठिति बनी हुई है.
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