India LPG Imports: पश्चिम एशिया हालिया तनाव के बीच भारत ने एलपीजी सप्लाई की रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है. अब देश गैस की जरूरतों के लिए सिर्फ गल्फ कंट्रीज़ पर निर्भर नहीं रहना चाहता. यही वजह है कि जून में भी सबसे ज्यादा एलपीजी की खरीदारी अमेरिका से की गई है. आंकड़ों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अमेरिका लगातार भारत का सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर बना हुआ है, जबकि UAE, सऊदी अरब और कुवैत जैसे बड़े देशों से भी गैस सप्लाई जारी रहा है.
जून में अमेरिका से भारत ने 7.73 लाख मीट्रिक टन एलपीजी सप्लाई की, जो मई के मुकाबले करीब 19.4% ज्यादा है. वहीं, UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी सप्लायर रहा है, जहां से करीब 1.57 लाख मीट्रिक टन गैस सप्लाई की जा चुकी है. इसके साथ ही सऊदी अरब और कुवैत ने जून में 64-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की सप्लाई की है.
क्यों बदली भारत ने अपनी रणनीति?
हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर लोगों के बीच काफी हलचल मैच गई थी. ऐसे में भारत ने अलग-अलग देशों से ऊर्जा खरीद बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि फ्यूचर में किसी भी तरह की परेशानी न हो.
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कब बढ़ा LPG सप्लाई?
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का कुल एलपीजी सप्लाई बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है, जबकि मई में यह 11.55 लाख मीट्रिक टन था. यानी एक महीने में करीब 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
हालांकि, भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए अमेरिका से हर साल 22 लाख टन एलपीजी खरीदने के लंबी अवधि का समझौता भी किया है. इसका खास मकसद भारत और अमेरिका के बीच एनर्जी पार्टनरशिप को मजबूत करना है और किसी एक कंट्रीज़ पर निर्भरता को कम करना है.
आगे क्या रहेगा प्लान?
- भारत अब सिर्फ गल्फ कंट्रीज़ पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अलग-अलग देशों से एलपीजी की खरीद जारी रखेगा.
- अमेरिका सहित अन्य देशों से भी एलपीजी और कच्चे तेल का सप्लाई बढ़ेगी.
- सरकार का मकसद ऊर्जा सुरक्षा को काफी मजबूत बनाना है, ताकि ईंधन की उपलब्धता में किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो.
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