Indian Economy: अमेरिका और भारत के बीच सालभर की लंबी बातचीत के बाद आखिरकार ट्रेड डील पर मुहर लग गई. इसके तहत, अमेरिका ने भारतीय सामानों के आयात पर टैरिफ को घटाकर अब 18 परसेंट कर दिया है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने इस डील के बाद भारत के लिए एक पॉजिटिव मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक का संकेत दे दिया है.

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GDP ग्रोथ को लेकर गोल्डमैन का अनुमान

गोल्डमैन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ट्रेड डील के लागू होने के बाद भारत के लिए टैरिफ रेट में कमी आएगी, जो इसे लगभग 15-19 परसेंट टैरिफ वाले दूसरे एशियाई देशों के बराबर लाकर खड़ा करेगा. भारत के इकोनॉमिक ग्रोथ पर डील के असर का आकलन करते हुए गोल्डमैन सैक्स ने कहा, "हमारा अनुमान है कि अगर नए कम टैरिफ लागू किए जाते हैं, तो GDP में लगभग 0.2pp (सालाना) की बढ़ोतरी होगी." यह अनुमान भारत के गुड्स एक्सपोर्ट एक्सपोजर पर बेस्ड है, जो GDP का लगभग 4 परसेंट है और US की फाइनल डिमांड और गुड्स एक्सपोर्ट डिमांड इलास्टिसिटी लगभग 0.7 है.

इन्वेस्टमेंट सेंटिमेंट पर रिपोर्ट में कहा गया कि डील पूरी होने से ट्रेड-पॉलिसी की अनिश्चितता कम होगी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के इरादों में सुधार होगा. साथ ही यह भी कहा गया कि CY26 की दूसरी छमाही में प्राइवेट कैपेक्स में रिकवरी से रियल GDP ग्रोथ में और भी बढ़ोतरी हो सकती है." इन सारी वजहों को देखते हुए गोल्डमैन सैक्स ने कहा, "कुल मिलाकर हम अपने CY26 के रियल GDP ग्रोथ के अनुमान को 20bp बढ़ाकर 6.9 परसेंट सालाना कर रहे हैं." 

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डील होने का यह भी फायदा

एक्सटर्नल बैलेंस के नजरिए से रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के एक्सपोर्ट पर टैरिफ कम होने से अनुमान है कि 2026 में करंट अकाउंट डेफिसिट GDP के लगभग 0.25 परसेंट से कम होकर GDP का 0.8 परसेंट हो जाएगा. 

गोल्डमैन सैक्स ने यह भी बताया कि ट्रेड टेंशन कम होने से फाइनेंशियल हालात बेहतर हो सकते हैं. कैपिटल फ्लो में रिकवरी से रुपये पर कुछ दबाव कम होगा."

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