India's Export Rise: भारत के लिए चीन एक बार फिर तेजी से उभरता हुआ प्रमुख निर्यात गंतव्य बन गया है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का चीन को निर्यात 33 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 12.22 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक यह वृद्धि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक अहम संरचनात्मक बदलाव का संकेत देती है. इससे पहले अप्रैल-नवंबर 2024-25 में भारत का निर्यात 9.2 अरब डॉलर रहा था, जबकि 2022-23 में यह 9.89 अरब डॉलर और 2023-24 में 10.28 अरब डॉलर था. मौजूदा वित्त वर्ष में दर्ज किया गया 12.22 अरब डॉलर का आंकड़ा न सिर्फ पिछले साल की सुस्ती से उबरने को दर्शाता है, बल्कि बीते चार वर्षों में सबसे अधिक भी है.

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इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़ा उछाल

आंकड़ों के अनुसार, निर्यात में यह तेजी कई क्षेत्रों में फैली हुई है और किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है. खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स खंड में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है. अप्रैल से नवंबर के दौरान ‘पॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड’ का निर्यात 2.39 करोड़ डॉलर से बढ़कर 92.24 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. इसके अलावा फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीफोनी से जुड़े अन्य विद्युत उपकरणों के निर्यात में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई.

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कृषि और समुद्री उत्पादों ने भी निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. चीन को भेजे जाने वाले प्रमुख उत्पादों में सूखी मिर्च, ब्लैक टाइगर झींगा, वन्नामेई झींगा, हरी मूंग और तेल खली के अवशेष शामिल हैं. इसके साथ ही एल्युमीनियम और परिष्कृत तांबे के बिलेट्स का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है, जिससे आधारभूत धातु क्षेत्र का योगदान मजबूत हुआ है.

कृषि-समुद्री मछली की अहम भूमिका

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और मूल धातुओं में फैली यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत का चीन को निर्यात अब ज्यादा व्यापक और विविध हो रहा है. यह उछाल किसी एक उत्पाद या उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय निर्यात के संरचनात्मक विस्तार को दर्शाता है. वहीं, निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका में ऊंचे शुल्क और सख्त व्यापार नीतियों के चलते भारतीय कंपनियां नए और वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रही हैं, जिसमें चीन एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में उभर रहा है.

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