India's Inflation Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ गया है. हालात यह हैं कि रुपया लगातार कमजोर होकर 93 रुपये प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया है, जिससे आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो रही है. वहीं देश में महंगाई भी लगभग दस महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. 

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल उपभोक्ताओं पर इसका बड़ा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन स्थिति लंबी खिंची तो ईंधन, यात्रा और रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है.

भारत पर संभावित असर

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1. ईंधन और गैस महंगी हो सकती है

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ सकते हैं. इससे यात्रा और दैनिक जीवन का खर्च बढ़ने की आशंका है.

2. आयात महंगा हो जाएगा

भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. रुपये की कमजोरी के कारण खाने-पीने की चीजों, औद्योगिक कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं.

3. विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी

रुपया कमजोर होने से विदेश यात्रा, विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस और अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा महंगी हो सकती हैं.

4. ईएमआई पर भी असर पड़ सकता है

अगर महंगाई बढ़ती है तो Reserve Bank of India को ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रहना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में लोन की ईएमआई कम होने की संभावना घट सकती है और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का दबाव बना रह सकता है. जाहिर है पश्चिम एशिया का संकट फिलहाल भारत में सीमित असर दिखा रहा है, लेकिन अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपया कमजोर होता है, तो इसका असर धीरे-धीरे महंगाई, ईंधन और रोजमर्रा के खर्चों के जरिए आम लोगों तक पहुंच सकता है।