अब नहीं होगा धोखा! ऐसे करिए असली-नकली नोटों की पहचान
वार्टर मार्क: भारतीय रुपये के नोटों पर बने गांधी जी की फोटो को अगर हल्के शेड वाली जगह पर तिरछी कर देखेंगे तो वार्टर मार्क दिखाई देता है.
सिक्योरिटी थ्रेड: नोट के बीचोंबीच सीधी लाइन पर ध्यान से देखने पर हिंदी में भारत और आरबीआई लिखा होता है. यह सिक्योरिटी थ्रेड होता है. ये काफी पतला होता है और साधारण देखने पर नहीं दिखाई देता लेकिन ध्यान से देखें तो लिखी हुई चीजें साफ दिखती हैं.
इस खबर के जरिए हमने आपको बताया है कि कैसे कोई भी आरबीआई की गाइडलाइंस के जरिए असली और नकली नोट की पहचान कर सकता है. यानी ऊपर बताई गई चीजें जिस भी नोट में होंगी वो नोट असली होगा और जिस नोट में ये चीजें नहीं होंगी वो नकली होगा.
ऑप्टिकल वेरिएबल इंक: ऑप्टिकल वेरिएबल इंक का इस्तेमाल 1000 और 500 रुपये के नोट में किया जाता है. नोट के बीच में 500 और 1000 के अंक को प्रिंट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. जब नोट को सीधा पकड़ा जाता है तो यह हरे रंग का दिखाई देता है और एंगल बदलने पर इसका रंग बदलता रहता है. आप नोटों की पहचान कैसे करें इसके लिए यूट्यूब पर आपको बाकायदा इसके लिए वीडियो भी मिल जाएंगे जिनके जरिए आप नोटों की सभी पहचान याद रख सकते हैं.
आरबीआई ने जो सर्कुलर जारी किया उसके मुताबिक 1000 रुपये के नकली नोट जिनकी सीरीज संख्या 2AQ और 8AC है और इन पर डॉ वाई वी रेड्डी के सिग्नेचर भी हैं ये नोट नकली हैं. तो इन नोटों को स्वीकार ना करें और अगर कोई इस सीरीज के नकली नोट बांट रहा है तो इसकी जानकारी बैंक को देनी चाहिए. आरबीआई इस सीरीज की करेंसी से आगाह रहने के लिए सर्कुलर जारी कर चुकी है. अब ये तो हो गई 1000 रुपये के नकली नोटों की बात लेकिन यहां आपको बताएंगे कि नकली और असली नोटों के बीच की पहचान क्या है यानी नोट को परख सकते हैं कि वो असली है या नहीं. आगे जानिए कैसे पहचानेंगे आपके हाथ में रखा नोट असली है या नकली-
माइक्रोलेटरिंग: ध्यान से देखने पर गांधी जी की तस्वीर के ठीक बराबर माइक्रोलेटर्स में संख्या लिखी होती है. 5 रुपये, 10 रुपये और 20 रुपये के नोट में यहां पर आरबीआई लिखा होता है. इससे ज्यादा के नोट पर माइक्रोलेटरिंग की जाती है.
लेटेंट इमेज: नोट पर गांधी जी की तस्वीर के बराबर एक लेटेंट इमेज होती है जिसमें जितने का नोट है उसकी संख्या लिखी होती है. यह नोट को सीधा करने पर दिखाई देता है.
आईडेंटिफिकेशन मार्क: यह वाटर मार्क के बाईं ओर होता है. सभी नोटों में यह अलग-अलग साइज का होता है. जैसे 20 रुपये के नोट में ये वर्टिकल रेक्टेंगल, 50 रुपये के नोट में चौकोर, 100 रुपये के नोट में ट्राइएंगल, 500 रुपये के नोट में गोल और 1000 रुपये के नोट में डायमंड के आकार में होता है.
फ्लोरेसेंस: नोट पर नीचे की तरफ जो नंबर दिए होते हैं वो सभी उस खास सीरीज के तहत होते हैं जो नोटों के लिए जारी की गई है. इन नंबर्स को फ्लोरीसेंट इंक से प्रिंट किया जाता है. जब नोट को अल्ट्रावॉयलेट लाइट में देखते हैं तो ये उभरा हुआ दिखाई देते हैं.
भारत में नकली करेंसी की समस्या लगातार बढ़ रही है जिसकी वजह से सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) ने कुछ समय पहले एक सर्कुलर जारी कर लोगों को ये बताने की कोशिश की कि कौनसे नोट असली हैं और कौनसे नोट नकली हैं. इन तथ्यों को जानकर आप आसानी से नकली नोटों की पहचान कर सकते हैं.
इंटेग्लिओ प्रिंटिंग: किसी भी नोट पर इस्तेमाल होने वाली स्याही (इंक) एक खास तरह की होती है जिसकी वजह से नोट को छूने पर महात्मा गांधी की फोटो, रिजर्व बैंक की सील और प्रोमाइसिस क्लॉस, आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर उभरते हुए महसूस होते हैं.
सी थ्रू रजिस्ट्रेशन: सी थ्रू रजिस्ट्रेशन वाटर मार्क के साइड में फ्लोरल डिजाइन के रूप में होता है. यह नोट के दोनों साइड दिखाई देता है. एक साइड यह खाली होता है और दूसरी साइड यह भरा हुआ दिखाई देता है.