IMF Growth Prediction for India: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कुछ ऐसा कह दिया है, जो पूरी दुनिया के लिए सही नहीं है. दरअसल, IMF ने वैश्विक विकास दर के अनुमान में कटौती की है. साथ में यह भी कहा है कि दुनिया पहले से ही एक बहुत ज्यादा प्रतिकूल स्थिति की ओर बढ़ रही है.

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बिगड़ सकते हैं और हालात

होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग में आ रही रुकावटों के चलते विकास दर काफी कमजोर हो सकती है. वाशिंगटन में IMF और वर्ल्ड बैंक की Springs Meetings के दौरान जमा हुए दुनिया भर के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों के बीच पश्चिमी एशिया में संघर्ष को लेकर भारी अनिश्चितता छाई हुई है. ऐसे में IMF ने विकास के तीन परिदृश्य पेश किए हैं—कमजोर, बदतर और गंभीर—जो इस बात पर निर्भर करेंगे कि युद्ध किस दिशा में आगे बढ़ता है.

भारत के लिए 'गुड न्यूज'

बता दें कि 2026 में वैश्विक विकास दर को लेकर IMF का पिछला अनुमान 3.3 था, जिसे अब घटाकर 3.1 परसेंट कर दिया गया है. हालांकि, भारत के लिए इसे पहले के 6.4 परसेंट के अनुमान से बढ़ाकर 6.5 परसेंटकर दिया है. इसकी वजह अमेरिकी टैरिफ में भारी कमी, मजबूत घरेलू मांग है, जो अमेरिका-ईरान के बीच जंग के बुरे असर पर भारी पड़े. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच हुए एक व्यापारिक समझौते के तहत भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50 परसेंट से घटाकर 10 परसेंट दिया है.

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इसके अलावा, भारत में घरेलू खपत और मांग दोनों मजबूत बनी हुई है, जो वैश्विक झटकों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के तौर पर काम कर रही है. देश में महंगाई भी काबू में है और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भी सरकार ने फिलहाल राहत दे रखी है. इसे आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव माना है.

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