Currency: दुनियाभर में तनाव की स्थिति है, जबसे यूएस और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तभी से पूरी दुनिया इसकी मार झेल रही है. खासतौर से भारत पर इसका असर काफी पड़ रहा है. देश में पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ गए हैं, गैस के दामों में भी इजाफा हुआ है. इसके अलावा देश की करेंसी यानी रुपया भी कमजोर हो गया है. जिसे देख कई लोगों ने ये मान लिया है कि देश गरीब हो रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी भी देश की करेंसी के कमजोर होने से देश कभी भी गरीब नहीं होता. आइये जानते हैं क्यों?
कमजोर करेंसी, गरीब देश!मिडिल ईस्ट में जारी संकट और डॉलर की मजबूती के बीच कई देशों की मुद्राओं पर इसका दबाव बढ़ा है. ऐसे माहौल में अक्सर ये सवाल उठता है कि क्या कमजोर करेंसी का मतलब ये है कि देश आर्थिक रूप से कमजोर या गरीब है? इस सवाल का जवाब है नहीं! बिलकुल भी नहीं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण जापान है, जो इस धारणा को गलत साबित करता है.
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जापान की मुद्रा येन हाल के सालों में डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुई है. कई बार इसकी कीमत भारतीय रुपये के मुकाबले भी कम दिखाई देती है. इसके बावजूद जापान दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तकनीक, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी निर्माण में उसका दबदबा बना हुआ है.
जापान कैसे हो रहा मजबूत?दरअसल जापान एक एक्सपोर्ट बेस्ड देश है. यानी इस देश में उत्पादन ज्यादा होता है जो अन्य देशों में भी निर्यात किया जाता है. इससे देश में पैसा आता है और देश मजबूत होता है. वहीं इससे उलट भारत इम्पोर्ट बेस्ड देश है, हम अन्य देशों से ज्यादा सामान खरीदते हैं ऐसे में हमारा रुपया ज्यादा खर्च होता है. जब येन (जापान की करेंसी) वीक होता है तो जापान को ज्यादा फायदा होता है. क्योंकि इससे जापान का एक्सपोर्ट सस्ता हो जाता है और उसकी कमाई बढ़ जाती है.
वहीं, मौजूदा वैश्विक हालातों के बीच निवेशक जापानी येन को अब भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उथल-पुथल बढ़ने पर भी जापान की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहती है.
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