ICICI Bank Cuts FD and Savings Rates: बैंक जमा पर ब्याज दरें घटाने वाले बैंकों में अब आईसीआईसीआई भी शामिल हो गया है. एसबीआई, एचडीएफसी के बाद अब आईसीआईसीआई बैंक ने भी सेविंग्स एकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट दोनों पर ब्याज दरें घटा दी है. ये संशोधित दरें 17 अप्रैल 2027 से प्रभावी हो गई है. आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में कटौती के बाद अब बैंक ने ये कदम उठाया है.

अगर आईसीआईसीआई बैंक में आपका सेविंग एकाउंट है तो आपको उस पर अब कम ब्याज मिलेगा. 50 लाख रुपये के कम के अमाउंट पर प्रतिवर्ष ब्याज की दरें अब 2.75 प्रतिशत कर दी गई है, जो इससे पहले 3 प्रतिशत थी. इसके अलावा, अगर आपके सेविंग एकाउंट में 50 लाख रुपये या फिर उससे ज्यादा की रकम है तो ब्याज की दरों को 3.5 प्रतिशत से कम कर के 3.25 प्रतिशत कर दिया गया है.

कस्टमर्स को फिक्स्ड डिपॉजिट पर पर 3% से 7.05% तक ब्याज मिल रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को 3.5 प्रतिशत से 7.55 प्रतिशत तक की दरें मिल रही हैं. उदाहरण के लिए, 30 से 45 दिनों की FD पर अब सामान्य ग्राहकों को 3% ब्याज मिलेगा, जो पहले 3.5% था. इसी तरह, 61 से 90 दिनों की FD पर ब्याज दर 4.5% से घटाकर 4.25% कर दी गई है.

15 से 18 महीने की फिक्स्ड डिपॉजिट पर अब 6.8 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, जबकि पहले ये दर 7.25 प्रतिशत थी. 18 महीने से 2 साल की अवधि की FD पर भी ब्याज दर 7.25 प्रतिशत से घटाकर 7.05 प्रतिशत कर दी गई है. हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों को हर अवधि पर सामान्य ग्राहकों की तुलना में थोड़ा अधिक ब्याज मिल रहा है. उदाहरण के लिए, 7 से 29 दिनों की FD पर वरिष्ठ नागरिकों को 3.5 प्रतिशत ब्याज मिलता है, जबकि 46 से 60, 61 से 90, 91 से 184, और 185 से 270 दिनों की FDs पर ब्याज दर क्रमशः 4.75%, 4.75%, 5.25% और 6.25% तय की गई है.

खास बात ये है कि 2 साल 1 दिन से 5 साल की फिक्स डिपॉजिट पर सामान्य कस्टमर्स के लिए ब्याज दर थोड़ी बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दी गई है, और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 7.40 प्रतिशत है. वहीं, 5 साल 1 दिन से 10 साल तक की FD पर ब्याज दर घटाकर सामान्य ग्राहकों के लिए 6.8 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7.30 प्रतिशत कर दी गई है. 5 साल की टैक्स-सेविंग FD पर अब सामान्य ग्राहकों को 6.9 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 7.40 प्रतिशत ब्याज मिलेगा.

गौरतलब है कि ये बदलाव भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीतियों के चलते हुआ है, जो वर्तमान में ब्याज दरों को कम करने की दिशा में अग्रसर है. इसका असर बैंकों की जमा योजनाओं पर साफ़ दिखाई दे रहा है.

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