HRA Rules: पति-पत्नी जब दोनों एक ही शहर में सरकारी नौकरी में हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी क्वॉर्टर मिलता है, तो अकसर HRA (हाउस रेंट अलाउंस) के लिए पात्रता को लेकर सवाल उठते हैं. ऐसी स्थिति में इस ख्याल का आना लाजिमी है कि क्या दूसरा साथी भी HRA पाने कर हकदार है? इसे लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में नियम स्पष्ट कर दिए हैं. 

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हाउस रेंट अलाउंस को लेकर क्या है नियम? 

हाल ही में अगस्त 2026 में वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया कि अगर दोनों पति-पत्नी सरकारी कर्मचारी और दोनों की पोस्टिंग एक ही शहर में हो रखी है. इनमें से किसी एक को सरकारी आवास या क्वॉर्टर अलॉट है, तो दूसरे को HRA नहीं मिलेगा. जब परिवार को पहले से ही सरकारी मकान मिल चुका है, तो किराए पर अतिरिक्त खर्च करने की कोई जरूरत ही नहीं है. चूंकि परिवार को एक यूनिट माना जाता है इसलिए लाइसेंस फीस भी उसी कर्मचारी की सैलरी से कटती है, जिसके नाम पर क्वॉर्टर है. 

अगर मकान खुद का हो तो...?

वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) उन केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है जिनके पास सरकारी आवास नहीं है और जो किराए के मकानों में रह रहे हैं. अगर पति-पत्नी दोनों ही केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और एक ही शहर में तैनात हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी आवास मिलता है, तो सरकार यह मानती है कि परिवार को वह आवास मिल गया है इसलिए दूसरे जीवनसाथी को अलग से HRA नहीं दिया जाता है.

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हालांकि, अगर दोनों में किसी को भी सरकारी आवास नहीं मिला है और दोनों किराए पर या अपने खरीदे हुए मकान में रह रहे हैं, तो फिर पति-पत्नी दोनों अपने हिस्से का HRA क्लेम कर सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि नियमों के मुताबिक, सरकारी आवास अलॉट न होने की स्थिति में दोनों के साथ रहने पर भी दोनों कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी और शहर की कैटेगरी (X,Y,Z) के आधार पर अलग-अलग HRA पाने का अधिकार है. 

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