पतंजलि आयुर्वेद का दावा है कि कंपनी भारत के स्वास्थ्य और स्थिरता क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है. साल 2006 में शुरू हुई यह कंपनी आज आयुर्वेदिक उत्पादों, खाद्य पदार्थों और जीवनशैली से जुड़े नवाचारों के साथ देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रसर है.
पतंजलि ने बताया, ''कंपनी ने हाल ही में न्यूट्रेला स्पोर्ट्स ड्रिंक और प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स जैसे नए उत्पाद लॉन्च किए हैं, जो युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. कंपनी का दावा है कि ये उत्पाद प्राकृतिक सामग्रियों जैसे अश्वगंधा, तुलसी और शतावरी से बने हैं, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को भी प्रोत्साहित करते हैं. इनकी किफायती कीमत और आसान उपलब्धता ने इन्हें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाया है.''
विकसित किए हर्बल चाय और सीबकथॉर्न जैसे पौष्टिक उत्पाद
कंपनी ने कहा, ''स्थिरता के क्षेत्र में पतंजलि ने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. कंपनी मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा दे रही है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते. इसके अलावा पतंजलि ने रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) के साथ मिलकर सैनिकों के लिए हर्बल चाय और सीबकथॉर्न जैसे पौष्टिक उत्पाद विकसित किए हैं. ये प्रयास न केवल स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता को भी प्रोत्साहित करते हैं.''
कंपनी ने दावा किया, ''पतंजलि का प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रहा है. इसके उत्पाद 30 से अधिक देशों में निर्यात हो रहे हैं, जिससे आयुर्वेद और स्वदेशी ब्रांड की मांग बढ़ी है. कंपनी ने डिजिटल और ऑफलाइन मार्केटिंग के जरिए ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. पतंजलि का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रुपये का कारोबार करना है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा.''
स्वास्थ्य और संस्कृति को नई पहचान दे रहा पतंजलि
पतंजलि ने कहा कि पारंपरिक आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर पतंजलि ने भारतीय स्वास्थ्य और संस्कृति को नई पहचान दी है. यह न केवल एक कंपनी, बल्कि स्वदेशी, स्वास्थ्य और स्थिरता का एक आंदोलन है, जो भारत के भविष्य को उज्ज्वल बना रहा है.
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