ITR Revised Return Rules: इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कई बार हम जल्दबाजी में गलत फॉर्म चुन लेते हैं. कई बार तो हड़बड़ी में आय, बैंक अकाउंट, डिडक्शन या दूसरी जानकारी भरने में गलती हो जाती है. अच्छी बात ये है कि ऐसी गलतियों को बाद में सुधारा जा सकता है. इसके लिए आयकर विभाग रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की सुविधा देता है.

Continues below advertisement

कितनी बार कर सकते हैं सुधार?अगर आपने ITR फाइल करने के बाद कोई गलती पकड़ ली है तो आप सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर कई बार रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं. हालांकि, हर बार नया रिवाइज्ड रिटर्न पिछले रिटर्न की जगह ले लेता है. इसलिए अगली बार चेंजेज करने से पहले सारी जानकारी अच्छी तरह से जांच लें.

सावधान! SBI के नाम पर स्कैमर्स का गोरखधंधा, रिवॉर्ड पॉइंट का मैसेज भेजकर अकाउंट खाली करने का है प्लान

Continues below advertisement

क्या पेनाल्टी देनी होगी?अगर आपने समय रहते अपनी गलती सुधार ली और सही जानकारी के साथ रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर दिया तो सिर्फ रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए कोई अलग पेनाल्टी नहीं लगती है. लेकिन अगर गलती की वजह से टैक्स कम जमा हुआ है या आय छिपाई गई है तो आयकर कानून के तहत ब्याज या दूसरी कार्रवाई हो सकती है.

गलत फॉर्म भर दिया है तो?अगर आपने अपनी आय के हिसाब से गलत आईटीआर फॉर्म चुन लिया है तो भी घबराने की जरूरत नहीं है. आप सही फॉर्म के साथ Revised Return भर सकते हैं. ऐसा नहीं करने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव या अमान्य माना जा सकता है, जिससे रिफंड में देरी हो सकती है. इतना ही नहीं टैक्स विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता है.

E20 पेट्रोल पर भड़के व्हीकल ओनर, सर्वे में लोगों ने बताया 'विनाशकारी', कहा- माइलेज में आई गिरावट

कब तक भरना है रिवाइज्ड रिटर्न?नियम के अनुसार, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्सपेयर 31 मार्च 2027 तक रिवाइज्ड रिटर्न भर सकते हैं. हालांकि, अगर इससे पहले आपके मामले का असेसमेंट पूरा हो जाता है तो उसके बाद रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता है. इसलिए गलती का पता चलते ही उसे जल्दी से जल्दी सुधार लें.

रिवाइज्ड रिटर्न भरने से पहले रखें इन बातों का ध्यानरिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से पहले Form 26AS, AIS और TIS में दर्ज जानकारी को जरूर मिलाएं. बैंक खाते, पैन, आधार, आय, टीडीएस और डिडक्शन से जुड़ी सभी जानकारियां एक बार फिर जांच लें. इससे दोबारा गलती होने की संभावना काफी कम हो जाती है.